कर्ज न चुका पाने वाले छात्रों की बढ़ रही संख्या, बढ़ सकते है मंदी के आसार

अमेरिकी विश्वविद्यालयों से निकलने वाले छात्र जबरदस्त कर्ज में डूबे हुए हैं। रिकॉर्ड छात्र ऋण को देेश में अगली आर्थिक मंदी का बारूद कहा जा रहा है। इसका कारण है कि कर्जदाताओं के पैसों से दिए जाने वाले छात्र ऋण के 90 फीसदी मामलों में राज्य यह कर्ज देता है लेकिन ऋण न चुका पाने वाले छात्रों की बढ़ती संख्या से अमेरिकी वित्त विशेषज्ञ चिंतित हैं। अमेरिकी बिजनेस चैनल सीएनबीसी छात्र ऋण को कभी भी फूटने वाला बुलबुला बताया है तो फॉक्स न्यूज और मार्केट वॉच ने इसे बड़ा संकट बताया है।कर्ज न चुका पाने वाले छात्रों की बढ़ रही संख्या, बढ़ सकते है मंदी के आसार

ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूट के मुताबिक 2023 तक करीब 40 फीसदी छात्र कर्ज चुका पाने में नाकाम हो जाएंगे। ऐसे में संभव है कि देश के कर्ज में डूबने से एक बार फिर 2008 जैसी आर्थिक मंदी जैसे हालात पैदा हो जाएं। अमेरिकी मीडिया में अब छात्र ऋण की तुलना 2008 में डूबे लेमन ब्रदर्स इनवेंस्टमेंट बैंक से हो रही है, जिसके डूबने के साथ ही अमेरिका में मंदी शुरू हुई और फिर पूरी दुनिया उसकी चपेट में आ गई।  

जिन छात्रों ने 2016 में पढ़ाई शुरू की, उन पर औसतन 37,000 डॉलर का कर्ज चढ़ा हुआ है। अमेरिकन काउंसिल ऑन एजुकेशन के निदेशक जॉन फैनस्मिथ के मुताबिक कर्ज में दबने वाले छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। 2018 तक दो करोड़ छात्रों ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों में दाखिला लिया, जबकि 2000 में ऐसे छात्रों की संख्या 1.5 करोड़ थी। जॉब मार्केट की वजह से ऊंची डिग्री लेना जरूरी होता जा रहा है।

अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा खतरा

अमेरिका की मौद्रिक नीति तय करने वाले फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल ने अमेरिकी संसद से कहा है कि युवाओं का कर्ज में डूबना देर सबेर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगा। युवाओं के पास घर और कार खरीदने का पैसा नहीं होगा। वे खरीदारी करने में भी हिचकिचाएंगे। पॉवेल के मुताबिक कर्ज का बोझ मैक्रो अर्थव्यवस्था को खतरे में डालेगा।

ऋण माफी अर्जियां खारिज की गईं

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन ने छात्रों को राहत देने के लिए कर्ज माफी का कार्यक्रम चलाया था। इसके तहत पढ़ाई के बाद सरकारी नौकरी करने वाले छात्रों का ऋण माफ किया गया। लेकिन अमेरिकी शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में कर्ज माफी की 99.5 फीसदी अर्जियां खारिज कर दी गईं हैं। ट्रंप प्रशासन यह कार्यक्रम खत्म करना चाहता है।
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