मोदी सरकार बड़ा ऐलान, नहीं छपेंगे बंद हो चुके पूरे नोट

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साफ कह दिया है कि 15.44 लाख करोड़ रुपये के पुराने नोटों की जगह पर सरकार पूरे नोट नहीं छापेगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट से करेंसी की दिक्कत दूर की जाएगी। अरुण जेटली ने 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को अमान्य किए जाने को एक साहसिक कदम बताया और कहा कि भारत में इतनी क्षमता है कि वह इस तरह के कदम उठा सके और इसका अनुभव उठा सके!करेंसी की दिक्कत दूर करने के लिए सरकार उठाएगी यह कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादे के मुताबिक दिक्कतों के 12 दिन बाकी हैं, लेकिन अरुण जेटली के ताज़ा के बाद नई बहस छिड़ गई है। उनके बयान का मतलब है कि नए नोट छपने में लगने वाला वक्त अब और कम हो जाएगा।

करेंसी की दिक्कत कैसे दूर होगी आइये समझते हैं

नोटबंदी के समय कुल 15 लाख 44 हजार करोड़ रुपए बंद हुए थे।

आरबीआई की अगर माने तो मुताबिक 10 दिसंबर तक इसमें से 4 लाख 61 हजार करोड़ के नए नोट बाजार में आ चुके हैं।

अनुमान के मुताबिक इस रफ्तार से 31 दिसंबर तक 3 लाख 36 हजार करोड़ बाजार में आ जाएंगे।

यानी 31 दिसंबर तक कुल बंद नोटों में से लगभग आधी कीमत यानी 7 लाख 97 हजार करोड़ के नोट बाजार में आ जाएंगे।

ये तब है जब 2000 के नोट छप रहे हैं। अगर 1 जनवरी से सिर्फ 500 के नोट छपते हैं।

तो बंद हुए नोटों का बाकी का आधा हिस्सा यानी 7 लाख 47 हजार करोड़ रुपए बाजार में आने में 6 जून तक का वक्त लगने का अनुमान है।

अगर 25 प्रतिशत नकदी नहीं छापी जाए तो

अब मान लीजिए कि वित्त मंत्री अरुण जेटली के संकेतों के मुताबिक इसमें से 25 प्रतिशत नकदी नहीं छापी जाती है तो 3 लाख 86 हजार करोड़ के नोट नहीं छपेंगे।

ऐसे में बाजार में नोटों की जरूरत सिर्फ 11 लाख 58 हजार करोड़ ही रह जाएगी।

इसका मतलब ये है कि अभी नोटों के छपने में जितना वक्त लगने का अनुमान लगाया जा रहा है वो और कम हो जाएगा।

इस हिसाब से 11 लाख 58 हजार करोड़ रुपए के नोट 17 मार्च तक बाजार में आ जाएंगे

यानी 81 दिन पहले ही जरूरी नोटों की छपाई का काम पूरा हो जाएगा।

अगर 15 प्रतिशत नकदी नहीं छापी जाए तो

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जो संकेत दिए हैं उसके मुताबकि अब मान लीजिए कि इसमें से 15 प्रतिशत नकदी नहीं छापी जाती है तो 2 लाख 32 हजार करोड़ के नोट नहीं छपेंगे।

ऐसे में बाजार में नोटों की जरूरत 13 लाख 12 हजार करोड़ की रह जाएगी।

इस हिसाब से 13 लाख 12 हजार करोड़ रुपए के नोट 19 अप्रैल तक बाजार में आ जाएंगे।

यानी 48 दिन पहले जरूरी नोटों की छपाई का काम पूरा हो पाएगा।

अगर 10 प्रतिशत नकदी नहीं छापी जाए तो

वित्त मंत्री ने जो संकेत दिए हैं उसके मुताबकि अब मान लीजिए कि 10 प्रतिशत नकदी नहीं छापी जाती है तो 1 लाख 54 हजार करोड़ के नोट नहीं छपेंगे।

ऐसे में बाजार में नोटों की जरूरत 13 लाख 90 हजार करोड़ रह जाएगी।

इस हिसाब से 13 लाख 90 हजार करोड़ रुपए के नोट 5 मई तक बाजार में आ पाएंगे।

यानी 32 दिन पहले जरूरी नोटों की छपाई का काम पूरा हो पाएगा।

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