एसएसबी के साक्षात्कार में 18 बार विफल रहने पर भी सुमित ने नहीं मानी हार

सेना महज एक कॅरियर नहीं, बल्कि जज्बा है देश सेवा का। इस राह पर वही आगे बढ़ सकते हैं, जो स्वयं और परिवार से पहले देश पर अपना सर्वस्व कुर्बान करने को तत्पर रहते हैं। फिर चाहे राह कितनी ही मुश्किल क्यों न हो, मंजिल मिल ही जाती है। इसी तरह की बाधाओं को पार कर गाजियाबाद निवासी सुमित कुमार शनिवार को लेफ्टिनेंट बनकर सेना का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। देश की सेवा का उनका यह जुनून ही था कि लिखित परीक्षा पास करने के बाद एसएसबी (सर्विस सलेक्शन बोर्ड) के साक्षात्कार में 18 बार विफल रहने पर भी सुमित ने हार नहीं मानी। अखिरकार 19वें प्रयास में सफलता ने कदम चूम ही लिए।

सुमित कुमार बचपन से ही सेना में जाने का ख्वाब देखते थे। स्वामी विवेकानंद सरस्वती विद्या मंदिर, साहिबाबाद से 12वीं करते समय ही उन्होंने जनवरी 2012 को एनडीए की परीक्षा दी। तब उनकी उम्र महज साढ़े 16 साल की थी। उन्होंने लिखित परीक्षा में सफलता हासिल की, मगर एसएसबी क्लियर नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने तीन और बार एनडीए की परीक्षा दी और हर दफा वह एसएसबी में आकर अटक गए। अपने सपनों का सफर उन्होंने यहीं नहीं रोका, बल्कि टेक्निकल एंट्री स्कीम (टीईएस), एफकैट (एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट) के जरिये भी कोशिश जारी रखी। इसी दरम्यान श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से अर्थशास्त्र में स्नातक करते हुए सीडीएस की परीक्षा भी दी। उनका हुनर था कि सभी लिखित परीक्षा में वह पास होते रहे, मगर एसएसबी के साक्षात्कार को पास करने का संयोग नहीं बन पाया। इस तरह उन्होंने 18 बार एसएसबी का सामना किया।

सुमित बताते हैं कि बार-बार की विफलता के बाद समाज ने यह मान लिया था कि वह सेना के लिए नहीं बने हैं और उन्हें किसी अन्य सेवा में जाने की सलाह भी दी जाती। कई दफा उन्हें उपहास का पात्र भी बनाया जाता। इतना सब होने के बाद भी सुमित कुमार अपनी राह पर अडिग रहे। कहते हैं कि वह देश सेवा को कॅरियर नहीं, बल्कि जुनून मानते हैं। इसी जुनून की बदौलत पांच साल के अथक प्रयास के बाद जुलाई 2017 में सीडीएस की परीक्षा पास करते ही एसएसबी की बाधा पार करने में भी उन्होंने सफलता हासिल कर ली। तब उनकी उम्र 22 साल थी और अब सुमित 24 के हो चुके हैं। सुमित कहते हैं कि जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए और यही प्रवृत्ति जीत की राह भी प्रशस्त करती है।

इतने प्रयास किए

  • परीक्षा——-संख्या
  • एनडीए——-04
  • टीईएस——-04
  • एफकैट——-06
  • सीडीएस——05

परिचय

  • निवास, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
  • पिता, चेत राम, (दिल्ली में पर्यटन विभाग में सहायक अभियंता)
  • माता, सुनीता देवी (गृहणी)
  • दो भाई (मोहित व प्रदीप)
Back to top button