अमृतसर. दुनिया के जिन 5 मुल्कों को वीटो पावर मिली है उन्होंने इसका 245 बार इस्तेमाल किया मगर अमन के लिए नहीं बल्कि अपना वर्चस्व कायम करने के लिए। हालांकि सक्षम होने के बावजूद भारत ने ऐसा कभी भी नहीं किया, मगर उसे हकदार होने के बावजूद वीटो पावर नहीं दी गई। इस बाबत 20 देशों का नैतिक समर्थन लेकर अमृतसर पहुंचे नेेपाल के उप-राष्ट्रपति के राजनैतिक और सांस्कृतिक विशिष्ट सलाहकार महावीर प्रसाद टोरड़ी ने रविवार को यह भी कहा कि एशिया की नुमाइंदगी चीन की बजाय भारत को मिले।
वह इंडो-नेपाल समरसता सोशल मिशन यात्रा, 7300 दिवसीय कार्य योजना के तहत श्री दरबार साहिब में माथा टेकने आए थे। टोरड़ी अंतरराष्ट्रीय समरसता मंच एवं इंडो-नेपाल समरसता आर्गेनाइजेशन की संयुक्त पहल पर यह मिशन लेकर यहां पहुंचे हैं। इसके तहत वह पूरे देश में जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 1945 से अब तक जिन विकसित देशों को वीटो पावर मिली है उन्होंने इसका बेजा इस्तेमाल किया है और वही लोग निजी हितों के लिए भारत के रास्ते में रुकावटें पैदा करते रहे हैं।
उनका कहना है कि दुनिया के 136 विकासशील और आठ शक्तिशाली देशों में शामिल भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनाकर वीटो पावर दिलाने के लिए नेपाल के साथ 20 देश आ गए हैं। आने वाले दिनों में यह तादाद और बढ़ेगी। सभी देशों ने इस मुद्दे पर अपना ध्वज नेपाल को देते हुए नैतिक समर्थन किया है।
रोटी-बेटी का रिश्ता : टोरड़ी
टोरड़ी ने कहा कि भारत और नेपाल में वैदिक काल से रोटी-बेटी का रिश्ता रहा है। उनका कहना है कि नेपाल चाहता है कि भारत को फिर से वैदिक कालीन जगत गुरु वाली पदवी मिले। उन्होंने यात्रा के दौरान विभिन्न कारोबारियों व उद्यमियों से भी मुलाकात की और उनको नेपाल में निवेश करने का न्यौता भी दिया।