एलओसी पर शौर्यगाथा का नया अध्याय: उपराज्यपाल ने वॉर म्यूजियम का किया उद्घाटन

कुपवाड़ा जिले के तंगधार में बर्फ से ढकी चोटियों से घिरा खतरनाक इलाका कभी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होने वाली घुसपैठ के लिए जाना जाता था। इस दर्रे (पास) का नाम गुजरे जमाने की मशहूर अभिनेत्री साधना के नाम पर रखा गया है। एलओसी के पास वीरवार को यहां एसएम हिल पर सुविधाओं से लैस एक चेकपोस्ट और शौर्यगाथा संग्रहालय (वॉर म्यूजियम) के उद्घाटन के साथ ही यह इतिहास वर्तमान से जुड़ गया।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस शौर्य गाथा कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया। ये स्थान चारों ओर से साैंदर्य से परिपूर्ण पहाड़ियों से घिरा है। एलजी ने कहा, ये युद्ध संग्रहालय पूरे देश की ओर से एक संदेश है कि हम अपने वीर जवानों को हमेशा याद रखते हैं और हमेशा याद रखेंगे… ये पहाड़ हमारे सैनिकों की एकता के गवाह के रूप में खड़े हैं। युद्ध संग्रहालय में 1947-48, 1965, 1971 के संघर्षों और हाल ही के ऑपरेशन सिंदूर की वीरता और साहस की प्रदर्शनी देखने को मिलेगी।
उन्होंने कहा कि भारत रणभूमि दर्शन पहल के तहत वीरता स्थलों को बढ़ावा देने जैसी पहल इस क्षेत्र की समृद्ध रक्षा विरासत और संस्कृति को प्रदर्शित करने के साथ-साथ तंगधार-करनाह क्षेत्र में आर्थिक विकास और समृद्धि लाएगी।
10,269 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड ट्रांजिट फैसिलिटी और शौर्य गाथा संग्रहालय दुर्गम शमशाबारी रेंज में सैंड मॉडल हिल के ऊपर बनाया गया है। यह स्थान करनाह और कुपवाड़ा के बीच पड़ता है। ये ऊंचे और घने जंगलों वाले दर्रों के माध्यम से कश्मीर को जोड़ने वाला एक रास्ता है। यहां पर्यटन सर्किट में गर्माहट और आकर्षण जोड़ने वाला सुरम्य साधना कैफे है जहां पर्यटक हरी-भरी घाटियों, बर्फ से ढकी चोटियों और तंगधार के शांत परिदृश्य के लुभावने दृश्य हैं।
यहां एक तरफ इंटीग्रेटेड ट्रांजिट फैसिलिटी ड्रग्स तस्करी को रोकने के लिए एक चेकपोस्ट है तो वहीं दूसरी तरफ सेना की 28 इन्फैंट्री डिवीजन और 104 ब्रिगेड की ओर बनाया गया युद्ध संग्रहालय वीरता और साहस की कहानियों को याद दिलाता है। साधना पास पर बनी इन दोनों सुविधाओं का निर्माण दो साल से कम समय में किया गया है।
उद्घाटन समारोह में उत्तरी कमान के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, चिनार कोर के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह, विधायक जावेद अहमद मिरचल, अतिरिक्त मुख्य सचिव अश्विनी कुमार और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
बलिदान का जीवंत प्रतीक…उत्सव सा रहा माहाैल
साधना दर्रे का नाम तब बदला गया था जब फिल्म मेरे महबूब की अभिनेत्री साधना अक्तूबर 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सैनिकों को जीत की बधाई देने के लिए यहां पहुंची थीं।वीरवार को यहां का माहौल उत्सव जैसा था। उपराज्यपाल का स्वागत करने के लिए आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। उपराज्यपाल ने इस परिसर को बलिदान का एक जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सीमा की रक्षा करने वाले जवानों और नागरिक आबादी के बीच की भावनात्मक दूरी को पाटा जाना चाहिए। चाहे तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश या केरल का कोई युवा हो जब वह इस मिट्टी पर खड़ा होगा तो उसे वीरता की वह भावना मिलेगी जो कोई किताब नहीं सिखा सकती।
जवानों से उच्च सतर्कता बनाए रखने के निर्देश
एलजी ने सीमा पार से होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा, तंगधार एक रणनीतिक स्थान बना हुआ है जहां हमारा पड़ोसी लगातार नशीले पदार्थों की तस्करी की गतिविधियों को बढ़ाने का प्रयास करता रहता है। इस क्षेत्र में सेना द्वारा हवाई अड्डे जैसी सुविधा का विकास, नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ हमारे अभियान में एक महत्वपूर्ण संपत्ति के रूप में काम करेगा। पुलिस विभाग और सुरक्षा बल उच्चतम स्तर की सतर्कता बनाए रखें। कहा कि हमारी निगरानी इतनी पुख्ता होनी चाहिए कि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी अवैध नशीला पदार्थ हमारे क्षेत्र में प्रवेश न कर पाए।
तंगधार-करनाह के सात गांव वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में
एलजी ने बताया कि तंगधार-करनाह के सात गांवों को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत शामिल किया गया है। इससे इन गांवों में बेहतर बुनियादी ढांचा,आजीविका के अवसर और जीवन की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सकेगी। साधना टनल पूरे मौसम में आवागमन की सुविधा प्रदान कर व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा तथा आपदा राहत को सुगम बनाएगा। इससे क्षेत्र में कनेक्टिविटी, सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक बढ़ेंगी।





