एक क्लिक पर 5 रुपये देने वाली कंपनी ने ऐसे किया 3700 करोड़ का घोटाला

वहीं, कंपनी के निदेशक अनुभव मित्तल का कहना है कि उन्होंने कोई घपला नहीं किया है। सारा हिसाब-किताब ऑनलाइन रिकॉर्ड में है और उनके इस लेन-देन का पूरा टैक्स सरकार को भरा जाता है तथा मुनाफे को सदस्यों में बांटा जाता है। कोई भी चीज छिपी हुई नहीं है।

एक निश्चित रकम जमा करने के बाद निवेशकों से कंप्यूटर के सामने बैठे हुए बस हाथ के निशान पर माउस से क्लिक करते जाने के लिए कहा जाता था। कहा जाता था कि एक क्लिक करने पर आपके खाते में सीधे 5 रुपये आ जाएंगे। अगर आपके पास ज्यादा समय है तो इस क्लिक को फुल टाइम धंधा बनाकर रोजाना हज़ारों रुपये कमा सकते हैं।
एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि एब्लेज इंफो सॉल्यूशंस नाम की कंपनी सेक्टर-63 में अपना ऑफिस है और इस कंपनी ने निवेशकों से मल्टी लेवल मार्केटिंग के जरिए डिजिटल मार्केटिंग के नाम पर एक बड़ी ठगी को अंजाम दिया है। उन्होंने बताया कि डिजीटल मार्केटिंग के नाम पर 3700 करोड़ रुपये का घोटाला है।

टास्क फोर्स को कार्रवाई में कंपनी के कार्यालय से 6.30 लाख लोगों के फोन नंबर डाटाबेस में मिले हैं और 9 लाख लोगों के पहचान पत्र बरामद किए गए हैं। कंपनी के गिरफ्तार अधिकारियों में निदेशक अनुभव मित्तल, सीईओ श्रीधर प्रसाद और तकनीकी प्रमुख महेश शामिल हैं।
एसटीएफ ने बताया कि ये लोग खुद ही फर्जी कंपनियों के विज्ञापन तैयार करके पोर्टल पर डालते थे और सदस्य से ली रकम को ही सदस्यों में बांटते थे। एसएसपी की मानें तो सरकारी जांच एजेंसियों से बचने के लिए यह कंपनी एक माह से लगातार नाम बदल रही थी। पहले सोशल ट्रेड विज, फिर फ्री हब डॉटकाम से फेंजअप डॉट कॉम, इंटमार्ट डॉट कॉम और थ्री डब्ल्यू डॉट कॉम के नाम से यह कंपनी लोगों से धोखाधड़ी कर रही थी।
कंपनी के निदेशक यूपी के हापुड़ जिले के पिलखुवा का रहने वाला अनुभव मित्तल हैं। अनुभव के पिता की पिलखुवा में ही इलेक्ट्रॉनिक की दुकान है।
ऐसे लोग फंसते थे जाल में
जांच में सामने आया कि इस कंपनी के मकड़जाल में आम आदमी से लेकर पेशेवर वकील, चार्टर्ड एकाउंटेंट, व्यापारी और डॉक्टर तक शामिल हैं।
यह भी जानेंः सदस्य के जुड़ते ही होता था दोगुना भुगतान
कंपनी हर लिंक को लाइक करने के मेहनताने के रूप में अपने सदस्य को पांच रुपये का भुगतान करती थी। मसलन किसी सदस्य ने यदि 57500 रुपये की सदस्यता ली है तो कंपनी उसे रोजाना 125 लिंक देती थी।
इसके बाद यदि कोई सदस्य अपने नीचे दो सदस्य इतनी ही धनराशि देकर बनवाता था तो उसके लिंक दो गुने यानी रोजाना 250 के हो जाते थे। इतने लिंक लाइक करने पर रोजाना पांच रुपये के हिसाब से 1250 रुपये का भुगतान बनता था लेकिन कंपनी एडमिन चार्ज और टीडीएस काटने के बाद सदस्य के खाते में 1060 रुपये का भुगतान करती थी।





