ऊंची अदालत में मामला लंबित होने के बाद भी उजाड़ दी स्कूल परिसर में लगी फसल

कृषि शिक्षा के तहत स्कूली बच्चों ने लगाई थी धान की फसल
हत्यारोपियों से पैसा लेकर स्कूल के नाम दर्ज ग्राम समाज की जमीन को खारिज करने का आरोप
लखनऊ। फतेहपुर जिले के खागा तहसील में एसडीएम अमित भट्ट ने एक स्कूल के फार्म में खड़ी धान की फसल को जुतवा दिया। उनके इस तानाशाही भरे रवैए से स्थानीय लोगों में क्षोभ है। एसडीएम पर आरोप है कि उन्होंने गांव के हत्यारोपियों से पांच लाख रुपये लेने के बाद स्कूली बच्चों द्वारा लगायी गयी धान की फसल को जुतवाने का आदेश दिया है। यह आदेश उन्होंने ऊंची अदालत में मामला विचाराधीन होने के बावजूद दिया।
स्कूल प्रबंधक के मुताबिक 1958 में ग्राम प्रधान ने यह जमीन पट्टीशाह गांव के जूनियर हाईस्कूल के नाम कर दी थी। यह जमीन स्कूल के नाम बनी खतौनी में भी दर्ज है। इस पर वर्षों से बच्चे कृषि की व्यवहारिक शिक्षा ले रहे हैं। पचास साल से अधिक समय बीतने के बाद अब एसडीएम ने गांव के दबंगों से पांच लाख रुपये लेकर स्कूल का नाम खारिज कर दिया और उस जमीन को ग्राम समाज में दर्ज कर दी। जबकि मामला ऊपरी अदालत में विचाराधीन है। बावजूद इसके एसडीएम ने ऊपरी अदालत के किसी आदेश का इंतजार किये बिना स्कूल के बच्चों द्वारा लगाये गये धान की फसल को उजाड़ दिया।
विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय से जाता रहा फोन, पर नहीं उठाया
मामले का संज्ञान लेने के लिए विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित के कार्यालय से एसडीएम के पास कई बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन काट दिया। एक एसडीएम का विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय का फोन न उठाना भी इस बात को दर्शाता है कि कहीं न कहीं दाल में काला है और यह अफसर के तानाशाही भरे रवैए की पुष्टिï भी करता है।
न्यायालय के आदेश का पालन कराने को कहा गया था, स्कूल की जमीन को मेरे द्वारा ही खारिज किया गया है। मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि ऊंची अदालत में मामला है। गांव के गुंडे मौके पर कहां से आये इस बात की जानकारी नहीं है। कानूनगो की ओर से ट्रैक्टर आदि का इंतजाम किया गया था, वह टैक्टर किसके थे ,इसकी भी जानकारी नहीं है।
अमित भट्ट, एसडीएम खागा





