OMG…इस महिला को नहीं था मौत का खौफ, थी अकेले 50 हज़ार लोगों के मौत की जिम्मेदार

नई दिल्‍ली। मार्गरेट गीर्तोईदा जेले जासूसी की दुनिया का सबसे मशहूर नाम है। 15 अक्टूबर, 1917 को जेले को फायरिंग स्‍कड के सामने खड़ा कर गोलियों से भून दिया गया था। जेले को माता हरी के नाम से भी जाना जाता है। उन्‍हें करीब पचास हजार लोगों की मौत का जिम्‍मेदार ठहराया गया था। इसके अलावा उस पर जर्मनी के लिए जासूसी करने का भी आरोप था। माता हरी के कई प्रभावशाली व्यक्तियों से संबंध थे।OMG...इस महिला को नहीं था मौत का खौफ, थी अकेले 50 हज़ार लोगों के मौत की जिम्मेदार

जेले या माता हरी एक एक बेहतरीन डांसर थी। फर्स्‍ट वर्ल्‍ड वार के दौरान वह पेरिस में एक डांसर और स्ट्रिपर के रूप में मशहूर थीं। उनके डांस को देखने के लिए राजनीति और सेना के बड़े नामी लोग आया करते थे। यह वह दौर था जब माता हरी ने एक देश की सीक्रेट इफोर्मेशन को इधर से उधर करने का काम शुरू किया था।अपनी अदाओं के जरिए उसके लिए यह काम धीरे-धीरे आसान होता चला गया। जर्मन के प्रिंस समेत कई प्रभावशाली लोगों के साथ माता हरी के संबंध थे।

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माता हरी की शादी इंडोनेशिया में तैनात नीदरलैंड की शाही सेना के एक अधिकारी से हुई थी। शादी के बाद इन दोनों ने कुछ समय जावा में गुजारा। यहां पर वह एक डांस कंपनी में शामिल हो गईं और अपना एक नया नाम रखा माता हारी। 1907 में हा‍री ने नीदरलैंड्स लौटने के बाद अपने पति को तलाक दे दिया और पेशेवर डांसर के रूप में पेरिस चली गईं। यहां पर उसकी मादक अदाओं के किस्‍से हर किसी की जुबान पर थे। इसी दौरान फ्रांस की सरकार ने माता हरी को पैसों के बदले जासूसी करने के लिए राजी किया था।OMG...इस महिला को नहीं था मौत का खौफ, थी अकेले 50 हज़ार लोगों के मौत की जिम्मेदार

फर्स्‍ट वर्ल्‍ड वार में हरी के जरिए फ्रांस ने जर्मनी की कई सीक्रेट इंफोर्मेशन को हासिल किया था। यहां से ही हरी की पैसे की भूख इस कदर बढ़ी तो उसने जासूसी के पेशे में डबल स्‍टेंडर्ड का गेम शुरू कर दिया। एक तरफ जहां वह फ्रांस की खबर जर्मनी को देती वहीं जर्मनी की खबर फ्रांस को देती थी। इसकी जानकारी बाद में फ्रांस के सीक्रेट डिपार्टमेंट लग गई।

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सन् 1917 में फ्रांस में माता हरी को अरेस्ट किया गया। यहां पर उसका कोई झूठ नहीं चल सका। फ्रांसीसी सेना ने उसके खिलाफ जो सुबूत पेश किए उसमें स्पेन की राजधानी मैड्रिड से जर्मनी की राजधानी बर्लिन भेजे जा रहे कुछ सीक्रेट्स भी थे। उन्हें 50 हजार लोगों के मौत का जिम्मेदार ठहराया गया और 15 सितंबर, 1917 में गोलियों से भूनकर मौत की सजा दी गई। उस वक्‍त वह 41 वर्ष की थी। उस पर डबल एजेंट होने का आरोप लगाया गया। उसके बारे में कहा जाता है कि जब फायरिंग स्‍कड के सामने हरी को खड़ा किया गया तो उसको आंख बंद करने को कहा गया। लेकिन उसने ऐसा करने से न सिर्फ इंकार किया बल्कि उसने अपने सामने गोलियां दागने को तैयार जवानों को फ्लाइंग किस भी दिया।

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