पितृपक्ष: इस जगह श्राद्ध करने से पितरों को मिलता है मोक्षधाम, होता है लाभ

पितृपक्ष महीना आरम्भ हो चुका है और लोग अपने पूर्वजों की संतुष्टि के लिए श्राद्ध कर्म ,तर्पण कर रहे हैं। इस महीने में बिहार स्थित गया तीर्थ का महत्व काफी बढ़ जाता है। क्यूंकि कहा जाता है कि जो लोग अपने पूर्वजों के श्राद्ध को गया के तट पर करते हैं तो उनके पूर्वजों को सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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श्राद्ध के लिए गया को बहुत महत्त्व दिया गया है। यहां पर एक बहुत बड़ी चट्टान है जिसका संबंध परलोक से माना जाता है। यहां की मान्यताओं और गरुड़ पुराण की कथा के अनुसार इस शिला की दरारों से पितरों का आगमन होता है और वह पिंड ग्रहण करके अपने लोक वापस लौट जाते हैं। ऐसा भी कहा गया है कि भगवन श्री राम ने भी अपने पिता दशरथ जी का श्राद्ध भी गया के तट पर ही किया था।ये भी
लोक मान्यता के अनुसार गयासुर नामक भगवान विष्णु के भक्त के शरीर पर यह नगरी बसी है। गयासुर ने ही भगवान से यह वरदान पाया था कि यहां पर मृत्यु होने पर जीवों को नरक नहीं जाना पड़ेगा। गयासुर को प्राप्त वरदान के कारण से ही यहां पर श्राद्ध और पिंडदान करने से आत्मा को मुक्ति मिल जाती है।
यहां तिल, जौ और गुड़ मिले सत्तु पिंडदान करने की परंपरा है। यहां के पंडे भी विशेष हैं वैसे तो गया में ब्राह्मणों द्वारा श्राद्ध करने की परंपरा है, लेकिन यहां श्राद्ध कर्म ब्राह्मण नहीं पंडा करवाते हैं।





