आस्था का शिखर: हजारों फीट की ऊंचाई पर सुबर नाग मंदिर के खुले कपाट

सर्दियों के पांच महीने के बाद 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित 1,600 साल प्राचीन सुबर नाग मंदिर के कपाट सोमवार को रीति-रिवाज के साथ खोल दिए गए। वसंत ऋतु के आगमन और नाग बैसाखी पर आयोजित उत्सव में चिनाब घाटी और आसपास के क्षेत्रों से हजारों भक्त पहुंचे।

श्रद्धालुओं का उत्साह इस कदर था कि मंदिर तक पहुंचने के लिए 12 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण और खड़ी चढ़ाई पार की। भद्रवाह के विभिन्न क्षेत्रों चिंता, भलारा और शरोरा से तीर्थयात्री अपने साथ पवित्र चर्री मुबारक (पवित्र गदा) लेकर पहुंचे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दोपहर 2 बजे तक 12,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जिनमें 7,800 महिलाएं शामिल थीं।

देश के अन्य हिस्सों में मनाई जाने वाली बैसाखी से एक दिन पूर्व यह उत्सव विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है। शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित सुबर धार मंदिर के कपाट खुलते ही पूरी घाटी भगवान सुबर नाग के जयकारों से गूंज उठी। इस दौरान परंपरा का निर्वहन करते हुए मेढ़ों की बलि की रस्म अदा की गई।

सुरक्षा और स्वच्छता के कड़े प्रबंध
एसपी भद्रवाह विनोद शर्मा ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। विशेष बात यह रही कि प्रशासन ने धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा। ऊंचाई वाले घास के मैदानों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए प्लास्टिक संग्रहण केंद्र और विशेष स्वच्छता दल तैनात किए गए थे।

यह त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि प्राचीन नाग संस्कृति का जीवंत प्रतीक है जो सर्दियों के बाद जीवन और रंगों की वापसी का उत्सव है। -फुलैल सिंह, मुख्य पुजारी

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