आरबीआई: नोटबंदी के बाद बैंकों को दी गई नोटिस, ब्योरा देने से किया इनकार

रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने नोटबंदी के बाद किन बैंकों को कितनी रकम दी गई, इस पर कोई जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया है। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने आर.बी.आई. से जानकारी मांगी थी कि 8 नवंबर से बैंकों में कितनी रकम दी गई है।

बड़ी ख़बर: पूरे शहर ने किया एक साथ सुसाइड, चारो तरफ बिछ गयी लाशेंइस एक्ट के तहत सूचना सार्वजनिक नहीं की गई-
आरबीआई के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी पी विजय कुमार ने बैंकों को जारी की गई रकम पर चुप रहते हुए अनिल गलगली को बताया कि आरटीआई एक्ट 2005 की धारा 8 (1) (जी) के तहत ये सूचना सार्वजनिक नहीं की जा सकती। आरबीआई का तर्क ये था कि इस सूचना को सार्वजनिक करने से किसी शख्स के जीवन या शारीरिक सुरक्षा को खतरे में डालेगा जो विधि प्रर्वतन या सुरक्षा प्रयोजन को विश्वास में दी गई सूचना या सहायता के स्रोत की पहचान करेगा।

आरबीआई के इस फैसले को बताया गलत-
गलगली ने आरबीआई के इस तर्क को गलत बताया है। उनका मानना हैं कि नोटबंदी के दौरान सरकारी बैंकों की तुलना में निजी बैंकों को शायद अधिक रकम दी गई है। जिससे नोट की अदला-बदली आरबीआई की निर्धारित सीमा से अधिक काल के लिए जारी रही है। आम आदमी अभी भी एटीएम और बैंकों के सामने लाइन लगाए हुए परेशानी का सामना कर रहे हैं। नोटों के वितरण में आरबीआई ने पारदर्शी तरीका अपनाया है, इस बारे में जनता को आश्वासित किया जाना बेहद जरूरी है।

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