आज है बुध प्रदोष व्रत, पूजा का पूरा फल पाने के लिए जरूर पढ़ें भगवान शिव की यह चमत्कारी कथा

आज 15 अप्रैल है और भगवान शिव (Lord Shiva) की विशेष कृपा प्राप्त करने का अत्यंत पावन दिन यानी बुध प्रदोष व्रत (Budh Pradosh Vrat) है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जब प्रदोष व्रत बुधवार के दिन पड़ता है, तो इसे ‘बुध प्रदोष’ कहा जाता है।
आज के दिन भगवान भोलेनाथ के साथ-साथ विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा का भी विशेष विधान है। मान्यता है कि आज के दिन जो भी भक्त सच्चे मन से शिव जी की आराधना करता है और प्रदोष काल में यह व्रत कथा पढ़ता या सुनता है, उसके जीवन के सभी संकट महादेव स्वयं हर लेते हैं।
तो आइए, आज इस शुभ अवसर पर पूरे श्रद्धाभाव से पढ़ते हैं बुध प्रदोष व्रत की यह पौराणिक कथा:
बुध प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा
प्राचीन काल की बात है, एक युवक का नया-नया विवाह हुआ था। विवाह के महज़ दो दिन बाद ही उसकी पत्नी अपने मायके चली गई। कुछ दिन बीतने के बाद, वह युवक अपनी पत्नी को वापस लाने के लिए ससुराल पहुंचा। संयोग से उस दिन बुधवार था। जब उसने पत्नी को विदा करने की बात कही, तो सास-ससुर और अन्य लोगों ने उसे समझाया कि शास्त्रों के अनुसार बुधवार के दिन कन्या को विदा करना शुभ नहीं माना जाता। लेकिन, युवक अपनी जिद पर अड़ा रहा और किसी की बात नहीं मानी। अंततः, विवश होकर माता-पिता ने भारी मन से अपनी पुत्री को उसके साथ विदा कर दिया।
पति-पत्नी अपने नगर की ओर लौट रहे थे। नगर के बाहर पहुंचते ही पत्नी को जोरों की प्यास लगी। युवक अपनी पत्नी को एक पेड़ की छांव में बैठाकर पानी की तलाश में निकल गया। थोड़ी देर बाद जब वह पानी लेकर लौटा, तो वहां का दृश्य देखकर उसके होश उड़ गए। उसने देखा कि उसकी पत्नी किसी अन्य पुरुष के साथ हंस-हंसकर बातें कर रही है और उसी के लोटे से पानी भी पी रही है।
क्रोध में आग बबूला होकर जब वह युवक उनके निकट पहुंचा, तो उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। उस दूसरे व्यक्ति की शक्ल-सूरत बिल्कुल उसी (युवक) के जैसी थी! पत्नी भी दोनों को एक जैसा देखकर भ्रम में पड़ गई कि आखिर उसका असली पति कौन है। देखते ही देखते दोनों हमशक्लों के बीच तीखी बहस और झगड़ा शुरू हो गया। हंगामा देखकर वहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और नगर के सिपाही भी वहां पहुंच गए। हमशक्ल आदमियों को देखकर हर कोई हैरान था।
सिपाहियों ने जब स्त्री से पूछा कि तेरा असली पति कौन है, तो वह असमंजस में हो गई। इस भयानक संकट और अपमान से घिरकर, असली पति को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने हाथ जोड़कर सच्चे मन से भगवान शिव को पुकारा और मन ही मन प्रार्थना की कि “हे महादेव! मेरी रक्षा करें। मुझसे आज बहुत बड़ी भूल हुई कि मैंने अपने सास-ससुर की बात नहीं मानी और बुधवार के दिन पत्नी को विदा करा लाया। मुझे क्षमा करें, मैं अब भविष्य में कभी ऐसी गलती नहीं करूंगा।”
भगवान भोलेनाथ तो अत्यंत दयालु हैं। जैसे ही युवक की प्रार्थना पूरी हुई, वह दूसरा हमशक्ल पुरुष अचानक हवा में अंतर्ध्यान (गायब) हो गया। यह चमत्कार देखकर वहां मौजूद सभी लोग चकित रह गए। इसके बाद पति-पत्नी ने महादेव का कोटि-कोटि धन्यवाद किया और सकुशल अपने घर लौट आए।
कहते हैं कि उस दिन के बाद से उस पति-पत्नी ने जीवन भर पूरे नियम और श्रद्धा के साथ प्रदोष व्रत रखना शुरू कर दिया और उनका जीवन सुखमय हो गया।





