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बेनकाब हुए कश्‍मीर के अलगाववादी नेता; रहते हैं पाकिस्‍तानी आतंकियों के संपर्क में

जी हाँ!! एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है कि कश्‍मीर के अलगाववादी नेता सबूतों के साथ बेनकाब हुए हैं, जिससे यह पता चला है की वे पाकिस्‍तानी आतंकियों के संपर्क में रहतें हैं| कश्‍मीर के अलगाववादी नेताओं पर पहले से ही ये आरोप लगते रहे हैं कि वो पाकिस्‍तान के इशारे पर घाटी में हिंसा फैलाते हैं। लेकिन, अब सबूत भी सामने आ गया।

बेनकाब हुए कश्‍मीर के अलगाववादी नेता; रहते हैं पाकिस्‍तानी आतंकियों के संपर्क में

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कश्‍मीर घाटी में बढ़ते आतंकवाद और आतंकी घटनाओं को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। खबर ये है कि कश्‍मीर के अलगाववादी नेताओं के तार पाकिस्‍तानी आतंकियों से जुड़े हैं। जिसके चलते पाक आतंकियों को कश्‍मीर में लोकल सपोर्ट मिल पाता है। ये बड़ा खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि मंगलवार को लोकसभा में गृह राज्‍यमंत्री हंसराज अहीर ने किया। उन्‍होंने सदन को बताया कि घाटी के कुछ बड़े अलगाववादी नेता सीमा पार और पाक अधिकृत कश्‍मीर में आतंकियों के आकाओं के संपर्क में रहते हैं। इतना ही नहीं गृह राज्‍यमंत्री हंसराज अहीर ने सदन में ये भी बताया कि घाटी में अशांति फैलाने के लिए पाकिस्‍तान की ओर से इन नेताओं को ना सिर्फ निर्देश मिलते हैं बल्कि फंडिंग भी होती है।

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लोकसभा में गृह राज्‍यमंत्री हंसराज अहीर एक सवाल का जवाब दे रहे थे। सवाल के जवाब में हंसराज अहीर ने कहा कि पड़ोसी राज्‍य द्वारा प्रायोजित आतंकवाद और आतंकी तत्वों और घाटी के अलगाववादी नेताओं के बीच सांठगांठ के सुराग मिले हैं। उन्‍होंने ये भी कहा कि इन लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा रही है। किसी को भी बख्‍शा नहीं जाएगा। गृह राज्‍यमंत्री हंसराज अहीर ने लोकसभा में बताया कि कश्‍मीर के कुछ बड़े अलगाववादी नेता पाकिस्‍तान और पाक अधिकृत कश्‍मीर में आतंकियों के सरगनाओं के संपर्क में पाए गए हैं। उन्‍होंने सदन को ये भी बताया कि सरकार का ऐसा मानना है कि इन नेताओं को पाकिस्‍तान से निर्देश के साथ-साथ फंडिंग भी होती है।

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लोकसभा में सरकार से ये भी सवाल किया गया कि क्‍या कश्‍मीर के अलगाववादी नेताओं की सिक्‍योरिटी समेत अन्य सुविधाओं का खर्च केंद्र सरकार उठाती है। इसके जवाब में हंसराज अहीर ने बताया कि केंद्र सरकार इस तरह का कोई भी खर्च नहीं उठाती है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा का खर्च और जिम्‍मा जम्मू-कश्मीर सरकार उठाती है। उन्‍होंने कहा कि सिक्यॉरिटी रिव्यू कोऑर्डिनेशन कमिटी के फैसले के बाद ही ऐसा किया जाता है। इस तरह की सिक्‍योरिटी के तहत ऐसे नेताओं को पर्सनल गार्ड्स, स्टैटिक गार्ड्स और गाड़ियां मिलती हैं। खुफिया सूचनाओं के मुताबिक हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद यहां के अलगाववादी नेताओं ने कश्‍मीर को भड़काने में अहम भूमिका निभाई थी।

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इतना ही नहीं, एनआईए घाटी में हिंसा के दौरान विदेशी फंडिंग की भी जांच कर रही है। जिसमें कश्‍मीर के हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता सैयद अली शाह गिलानी के बड़े बेटे को पूछताछ के लिए नोटिस भी भेजा गया गया था। गिलानी के बेटे के अकाउंट में संदिग्‍ध ट्रांजिक्‍शन पाया गया था। इसके अलावा कई और भी ऐसी जानकारियां मिल चुकी हैं जिससे ये साबित होता है कि ये कश्‍मीर के युवाओं को बहका कर उन्‍हें आतंकवाद के रास्‍ते पर धकेल रहे हैं। उनसे भड़का और रुपया का लालच देकर उसने कश्‍मीर में सुरक्षाबलों पर पथराव कराया जाता है। इतना ही नहीं घाटी के अलगाववादी नेता कश्‍मीर में छिपे आतंकियों को पूरा लोकल सपोर्ट भी मुहैया कराते थे और उनके मारे जाने के बाद उनकी मौत पर भी लोगों को भड़काते हैं।

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