अमेठी संसदीय सीट पर मिली हार की वजह तलाशने के लिए अमेठी पहुंचे राहुल गांधी

लोकसभा चुनाव में अमेठी संसदीय सीट पर मिली हार की वजह तलाशने के लिए राहुल गांधी आज यानी बुधवार को अमेठी पहुंचे हैं. राहुल का यह दौरा अब तक के बाकी दौरे से काफी अलग है. राहुल खुद मौन रहकर कांग्रेस के छोटे-बड़े कार्यकर्ताओं के मन की बात सुनेंगे. राहुल अपने इस दौरे के जरिए यह संदेश देने की कोशिश करेंगे कि हार के बाद भी उनका अमेठी से रिश्ता टूटा नहीं है.
राहुल गांधी गौरीगंज के निर्मला देवी डिग्री कॉलेज में कांग्रेस के नेताओं से संवाद करेंगे. राहुल कांग्रेस के ग्राम सभा, न्याय पंचायत और ब्लाक अध्यक्षों से मुलाकात करेंगे. इसके अलावा ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत के सदस्यों को भी बैठक में बुलाया गया है.
राहुल इन सभी नेताओं के मन की बात सुनेंगे लेकिन अपनी बात नहीं कहेंगे. राहुल गांधी अमेठी के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के मीटिंग के बाद उनके साथ भोजन करेंगे. लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल अमेठी दौरा उसी तरह से है, जैसे आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव में संजय गांधी हार गए थे. संजय गांधी हार के बाद अमेठी आने जाने का सिलसिला बंद नहीं किया था. इसका नतीजा था कि तीन साल के बाद जब 1980 में लोकसभा चुनाव हुआ तो भारी मतों से जीत दर्ज करने में कामयाब रहे थे.
राहुल गांधी भी उसी तर्ज पर अमेठी में अपना नाता कायम रखना चाहते हैं. इसीलिए हार के बाद वो अब अमेठी जा रहे हैं और इस दौरे के जरिए कार्यकर्ताओं और नेताओं की निराशा के भाव को खत्म करने की कवायद करेंगे ताकि अगले चुनाव में वह वापसी कर सकेंगे.
अमेठी को कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन इस बार राहुल गांधी को बीजेपी की स्मृति ईरानी के हाथों करारी हार का मुंह देखना पड़ा है. इस हार ने कांग्रेस को अंदर तक हिलाकर रख दिया है. इसी का नतीजा था कि अमेठी में पार्टी के जिलाध्यक्ष योगेश मिश्र को उन्होंने खास तौर से बुलाया था. प्रियंका ने उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाई थी.
राहुल गांधी जब अमेठी से लोकसभा सदस्य थे तो चंद्रकांत दुबे उनके सांसद प्रतिनिधि हुआ करते थे. अमेठी राहुल के कामकाज को चंद्रकांत दुबे देखा करते थे, लेकिन पार्टी से नेताओं को जोड़ना तो दूर पुराने कांग्रेसियों को भी संभालकर नहीं रख सके. हालत यह हो गई थी कि चुनाव के दौरान वह कांग्रेसियों से समर्थन मांगना को दूर उनसे मुलाकात तक नहीं कर सके. राहुल के चुनाव हारने के बाद से ही दुबे अमेठी से गायब हैं.





