अपनी दौलत की बदौलत चार मुल्कों के प्रतिबंधों को ठेंगा दिखाने में जुटा है कतर


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गायों के पालन और दूध की सप्लाई के लिए जरूरी संसाधन भी जुटा लिए गए हैं। इसके अलावा देश के नागरिकों ने विदेश उत्पादों को त्यागकर स्वदेशी सामान को अपनाने की मुहिम भी शुरू कर दी है। मतलब साफ है कि कतर किसी सूरत में अरब देशों की दबंगई के आगे झुकने को तैयार नहीं है।
कतर को अरब देशों में सबसे अमीर और विकसित माना जाता है उसकी यही खूबी दूसरे खाड़ी मुल्कों की आंखों में खटकती है और यही बात खुद को अरब मुल्कों के अगुआ मानने वाले सऊदी अरब को भी परेशान करती रही है। इसीलिए मामूली से आरोपों के बीच सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे मुल्कों ने एक झटके में कतर के खिलाफ प्रतिबंध ठोक दिए, जबकि कतर उन आरोपों पर सफाई देता ही रह गया।
प्रापर्टी के इस साम्राज्य में कैनेरी वार्फ ग्रुप का बड़ा हक है जिसे कतर ने दो साल पहले ब्रुकफील्ड प्रापर्टी पार्टनर्स के साथ मिलकर 2.6 बिलियन पाउंड में खरीदा था। इस ग्रुप के पास लंदन के साउथ बैंक में बना शैल सेंटर और वॉकी टॉकी बिल्डिंग है। कतर के पास लंदन के सेवाय होटल में दस फीसदी और शार्ड होटल में 95 फीसदी की हिस्सेदारी है।
इसके लिए जनरल डिपार्टमेंटल स्टोर की चेन हैराड्स को भी कतर ने 1.5 बिलियन पाउंड में खरीदा है। लंदन के प्रमुख बार्कले बैंक में भी कतर की बड़ी हिस्सेदारी है।
इंग्लैंड से आजादी के बाद कतर ने पिछले चालीस सालों में काफी तेजी से तरक्की है। इस मुल्क ने अपनी तेल संपदा की ताकत को पहचाना और इसके दम पर दुनिया में बड़ा व्यापार किया। कतर के निर्माण उद्योग ने दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बनाई। राजधानी दोहा की गगनचुंबी इमारतें खाड़ी मुल्कों के साथ साथ विकसित देशों के सामने भी सीना तानकर खड़ी हैं।
अब अपनी इसी अकूत दौलत की बदौलत कतर ने पूरी तरह आत्मनिर्भर होने की तैयारी शुरू कर दी है। उसकी मौजूदा सबसे बड़ी जरूरत है खाद्य उत्पादन जिसके लिए वह लगभग पूरी तरह दुनिया के दूसरे मुल्कों पर निर्भर है।
हालांकि इस कठिन वक्त में ईरान उसकी मदद को आगे आया है और उसने कई जहाज भरकर खाद्यान्न कतर के लिए भिजवाया है। आगे भी उसने इसी तरह मदद का भरोसा दिया है। हालांकि इन सबसे अलग कतर ने खुद भी इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है और साल 2030 तक खाद्यान्न उत्पादन में खुद को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए कमर कस ली है।





