अंतरिक्ष पर भी पड़ा अमेरिकी शटडाउन का असर, हबल को ठीक करना मुश्किल

साल 2009 में संपन्न पिछले सर्विसिंग मिशन के बाद उम्मीद थी कि यह साल 2014 तक काम करता रहेगा, आखिरकार ऐसा ही देखने को मिला और हबल अपनी हार्डवेयर समस्या के चलते अंतरिक्ष की वो तस्वीरें नहीं भेज पा रहा है जिसके लिए अमेरिका ने कभी इसे तैयार किया था।
क्या है ‘हबल’ का इतिहास
हबल को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ ने यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी के सहयोग से तैयार किया था। अमेरिकी खगोल विज्ञानिक एडविन पोंवेल हबल के नाम पर इसे ‘हबल’ नाम दिया गया। यह नासा की प्रमुख वेधशालाओं में से एक है। पहले इसे वर्ष 1983 में लांच करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन कुछ तकनीकी खामियों और बजट समस्याओं के चलते इस परियोजना में सात साल की देरी हो गई थी।
इसके साल 1990 में इसे लांच करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि इसके मुख्य दर्पण में कुछ खामी रह गई, जिससे यह पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पा रहा है। तब साल 1993 में इसके पहले सर्विसिंग मिशन पर भेजे गए वैज्ञानिकों ने इस खामी को दूर किया था। यह एक मात्र दूरदर्शी है, जिसे अंतरिक्ष में ही सर्विसिंग के हिसाब से डिजाइन किया गया था।





