होलिका दहन: ये 12 मिनट देंगे शुभ फल

phpThumb_generated_thumbnail (6)एजेन्सी/विद्वतजन ने होलिका दहन का समय तय कर दिया है। राजकीय महाराजा आचार्य संस्कृत महाविद्यालय में हुई विद्वत गोष्ठी में 23 मार्च को शाम 6.36 से 6.48 के बीच का समय होलिका दहन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया। 
 
होली का पर्व 23 और रंगों का त्योहार धुलंडी 24 मार्च को मनाया जाएगा। इस बार 22 व 23 मार्च, दोनों दिन पूर्णिमा है। लेकिन, पहले दिन पूर्णिमा भद्रायुक्त तो दूसरे दिन भद्रामुक्त है।
 
 
शास्त्रानुसार भद्रामुक्त पूर्णिमा में ही होलिका दहन को श्रेष्ठ माना गया है। ऐसे में शहर के पंचागकर्ताओं, धर्माचार्यों, ज्योतिषाचार्यों, महामण्डलेश्वर एवं प्रमुख संतों ने गोष्ठी बुलाकर होलिका दहन के लिए दिन एवं समय तय किया। 
 
गोष्ठी में विद्वतजन ने केवल 12 मिनट का समय सर्वश्रेष्ठ माना। पंडित दामोदर शर्मा ने बताया कि ऐसा योग कई वर्षों में आता है। इस बार पूर्व प्रदोषव्यापिनी पूर्णिमा में भद्रा है और दूसरे दिन पूर्णिमा प्रदोष से पूर्व समाप्त हो रही है। 
 
ऐसे में धर्म सिंधु के मत में 23 को ही होलिका दहन होना चाहिए। जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. विनोद शास्त्री ने बताया कि पूर्णिमा दूसरे दिन तीन प्रहर से अधिक हो व प्रतिपदा वृद्धिगामिनी हो तो उसी दिन सायंकाल होलिका दहन किया जाना चाहिए। इसके अनुसार 23 मार्च को शाम 6.36 से 6.48 के बीच होलिका दहन श्रेष्ठ रहेगा। 
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