हरियाणा के 393 सरकारी स्कूलों पर सरकार सख्त…

हरियाणा सरकार ने खेल सुविधाओं का विवरण समय पर उपलब्ध नहीं कराने वाले सरकारी स्कूलों के प्रति सख्त रुख अपनाया है। शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 393 सरकारी स्कूलों को फटकार लगाते हुए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे 20 जुलाई तक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टल पर अनिवार्य रूप से सभी जानकारी अपलोड कराएं।
विभाग के अनुसार अभी तक 151 सरकारी हाई स्कूल और 242 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों ने खेल सुविधाओं से संबंधित डेटा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों ने पहले से जानकारी अपलोड कर दी है, वे भी पोर्टल पर लॉग-इन कर आवश्यक संशोधन और अपडेट कर सकते हैं।
हिसार सबसे पीछे, पानीपत और जींद की स्थिति बेहतर
जिलावार समीक्षा में सबसे अधिक लापरवाही हिसार जिले में सामने आई है, जहां 105 स्कूलों का डेटा अभी तक लंबित है। इसके बाद चरखी दादरी में 91 और भिवानी में 69 स्कूलों ने जानकारी अपलोड नहीं की है। वहीं दूसरी ओर पानीपत में केवल एक स्कूल का डेटा लंबित है, जबकि जींद, कैथल और नूंह में सिर्फ दो-दो स्कूलों की जानकारी अपलोड होना बाकी है।
खेल संसाधनों की हो रही ऑनलाइन मैपिंग
शिक्षा विभाग प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में उपलब्ध खेल मैदान, खेल उपकरण, कोर्ट, रनिंग ट्रैक और अन्य खेल संसाधनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए ऑनलाइन मैपिंग अभियान चला रहा है। इसका उद्देश्य स्कूलों में खेल अधोसंरचना का सटीक डाटाबेस तैयार करना और भविष्य की योजनाओं को प्रभावी बनाना है।
अधूरी रिपोर्ट दोबारा अपलोड करने के निर्देश
विभागीय समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई स्कूलों ने अंतिम सबमिशन के दौरान सिविल स्ट्रक्चर से संबंधित मदों का चयन ही नहीं किया। ऐसे स्कूलों को अपनी रिपोर्ट का पुनः सत्यापन करने तथा यदि संबंधित विवरण दिखाई नहीं दे रहा है तो संशोधित रिपोर्ट दोबारा पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
20 जुलाई के बाद नहीं चलेगी लापरवाही
शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी स्कूलों का डेटा पोर्टल पर अपलोड कराया जाए। विभाग ने चेतावनी दी है कि 20 जुलाई के बाद खेल सुविधाओं से संबंधित जानकारी अपलोड करने में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी स्वीकार नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों एवं स्कूलों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।





