सोशल मीडिया साइट ट्विटर ने आखिरकार सेंट्रल गवर्नमेंट की मानी बात, ब्लॉक किए आपत्तिजनक हैंडल

सोशल मीडिया साइट ट्विटर ने आखिरकार सेंट्रल गवर्नमेंट की बात मान ली है और अब आपत्तिजनक अकाउंट्स को ब्लॉक करना शुरू कर किया जा चुका है। अपनी कंपनी के उच्च अफसर की संभावित गिरफ्तारी और वित्तीय पेनाल्टी के डर से ट्विटर ने ये निर्णय लिया है। ट्विटर ने अब गवर्नमेंट की ओर से चिन्हित उन अकाउंट्स को ब्लॉक करना शुरू कर दिया है, जो ज्वलनशील और विभाजनकारी पोस्ट करते हैं।  जंहा इस बात का पता चला है कि अमेरिका की माइक्रो-ब्लॉगिंग कंपनी बीते कुछ दिनों से दबाव में रही है, क्योंकि ट्विटर पर #ModiPlanningFarmerGenocide हैशटैग के साथ कई पोस्ट किए जा रहे थे।


सेंट्रल गवर्नमेंट की ओर से दबाव बनाने के उपरांत  ट्विटर ने गवर्नमेंट को आश्वासन दिया कि वो इस मुद्दे पर निगरानी बनाए हुए है, आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत सूचना एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय की ओर से भेजी गई ऐसे अकाउंट्स की सूची की देखरेख कर रहा है और उन हैंडल्स से किए जा रहे है पोस्ट को एक जगह एकत्र कर रहा है। अभी तक 709 अकाउंट्स को डिएक्टिवेट कर दिया गया है। सूत्रों ने कहा है कि 257 ऐसे ट्विटर हैंडल्स हैं, जिन्होंने #ModiPlanningFarmerGenocide हैशटैग के साथ शेयर किया था, कुछ ही दिन पहले इनमें से 126 अकाउंट्स को ब्लॉक कर किया जा चुका है।

जिसके अतिरिक्त 1,178 हैंडल्स पर गवर्नमेंट  को शक है कि वो खालिस्तानी, पाक तत्वों से जुड़े हुए हैं, जो गलत जानकारी प्रसार करते हैं, ऐसे 583 अकाउंट्स को ब्लॉक किया जा चुका है। IT एक्ट की धारा 69A(3) के अंतर्गत ट्विटर के उच्च अधिकारियों को चेतावनी दी गई कि उन्हें 7 साल की जेल हो सकती है। सूचना एवं प्रोद्योगिकी विभाग की ओर से बोला गया कि ट्विटर एक मध्यस्थ के तौर पर कार्य करता है, इसलिए इंडिया गवर्नमेंट निर्देशों का पालन करना जिसकी जिम्मेदारी है। ट्विटर अगर ऐसा करने से मना करता है तो उसे इसका खामियाजा भुगतना करना होगा।  जंहा इस बात का पता चला हैं कि  ट्विटर की कंटेट पर निगरानी रखने की अपनी एक अलग पॉलिसी है लेकिन सरकार के दबाव के बाद कंपनी को उन अकाउंट्स को ब्लॉक करना पड़ रहा है, जिसे सरकार ने आपत्तिजनक बताया है। 

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