सूर्य नमस्‍कार से करें दिन की शुरुआत, पूरा दिन जायेगा अच्छा

हमने शरीर को स्‍वस्‍थ और लचीला बनाए रखने के लिए कई तरह के सूक्ष्‍म व्‍यायाम किए. इसमें बताया गया कि अगर आपका शरीर स्‍वस्थ है तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी बॉडी का शेप क्‍या है. मगर स्‍वस्‍थ बने रहने के लिए जरूरी है कि आप नियमित तौर पर योगाभ्‍यास करें. आज के दिन सूर्य नमस्‍कार का योगाभ्‍यास विशेष रहता है. आप हम इसे अच्‍छी तरह से करेंगे. यह योग पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार करता है. यह कई आसनों का कॉम्‍बिनेशन है. इसे करते समय आप बीच बीच में शवासन का अभ्‍यास करते रहें. हर आसन के बाद थोड़ा थोड़ा रुक जाएं और अंत में अनुलोम विलोम का दस मिनट का अभ्‍यास जरूर करें. शरीर को फिट (Fit) और हेल्दी (Healthy) बनाए रखने के लिए नियमित तौर पर योग करना बहुत जरूरी है.
योग से न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य अच्‍छा रहता है, बल्कि इससे मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहता है. सुबह उठने पर शरीर में होने वाली अकड़न को दूर करने और दिन भर रिफ्रेश  बने रहने के लिए योगासन करें. इनकी मदद से कई बीमारियों  से न सिर्फ बचाव ही किया जा सकता है, बल्कि इन्‍हें दूर भी किया जा सकता है. योग करने से शरीर को एनर्जी  मिलती है और मन शांत रहता है. साथ ही व्‍यायाम से पहले ये तीन नियम जरूर ध्‍यान रखें कि इसमें अच्‍छा गहरा लंबा श्‍वास लें, गति का पालन करें और अपनी क्षमता के अनुसार योग करें.

सूर्य नमस्कार
सूर्य नमस्कार को सभी योगासनों में सबसे ज्यादा पावरफुल माना जाता है. सूर्य नमस्कार ऐसा योग है जो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखता है. पर सूर्य नमस्कार को करने का सही तरीका बहुत कम लोग जानते हैं.

प्रणाम आसन- इस आसन को करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पंजे जोड़कर अपने आसन मैट के किनारे पर खड़े हो जाएं. फिर दोनों हाथों को कंधे के समान्तर उठाएं और पूरा वजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालें. दोनों हथेलियों के पृष्ठभाग एक दूसरे से चिपकाए रहें और नमस्कार की मुद्रा में खड़े हो जाएं.

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हस्ततुन्नासन- इस आसन को करने के लिए गहरी सांस भरें और दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं. अब हाथ और कमर को झुकाते हुए दोनों भुजाओं और गर्दन को भी पीछे की ओर झुकाएं.

हस्तपाद आसन- इस आसन में बाहर की तरफ सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की तरफ नीचे की ओर झुकें. अपने दोनों हाथों को कानों के पास से घुमाते हुए ज़मीन को छूएं.

अश्व संचालन आसन- इस आसन में अपनी हथेलियों को ज़मीन पर रखें, सांस लेते हुए दाएं पैर को पीछे की तरफ ले जाएं और बाएं पैर को घुटने की तरफ से मोड़ते हुए ऊपर रखें. गर्दन को ऊपर की तरफ उठाएं और कुछ देर इसी स्थिती में रहें.

पर्वत आसन- इस आसने को करने के दौरान सांस लेते हुए बाएं पैर को पीछे ले जाएं और पूरे शरीर को सीधी रेखा में रखें और अपने हाथ ज़मीन पर सीधे रखें.

अष्टांग नमस्कार- इस आसन को करते वक्त अपने दोनों घुटने ज़मीन पर टिकाएं और सांस छोड़ें. अपने कूल्हों को पीछे ऊपर की ओर उठाएं और अपनी छाती और ठुड्डी को ज़मीन से छुआएं और कुछ देर इसी स्थिति में रहें.

भुजंग आसन- इस आसन को करते वक्त धीरे-धीरे अपनी सांस छोड़ते हुए छाती को आगे की और ले जाएं. हाथों को ज़मीन पर सीधा रखें. गर्दन पीछे की ओर झुकाएं और दोनों पंजों को सीधा खड़ा रखें.

सूर्य नमस्कार के फायदे- सूर्य नमस्कार करने से स्ट्रेस दूर होता है, बॉडी डिटॉक्स होती है और मोटापा घटता है. जिन महिलाओं को मासिक धर्म की समस्या है यह उनके लिए काफी लाभकारी होता है. रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है.

शवासन- मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं और आंखें मूंद लीजिए. पैरों को आराम की मुद्रा में हल्का खोल कर रखें. पैर के तलवे और उंगलियां ऊपर की तरफ होनी चाहिए. हाथों को बगल में रखकर हथेलियों को ऊपर की तरफ खोलकर रखें. पैर से लेकर शरीर के हर भाग पर ध्यान केंद्रित करते हुए धीरे-धीरे सांस अन्दर बाहर करें. धीरे धीरे इसे कम करें. जब शरीर में राहत महसूस हो तो आंखों को बंद करके ही थोड़ी देर उसी मुद्रा में आराम करें.

ताड़ासन- ताड़ासन संस्कृत के दो शब्द ताड़ अर्थात पर्वत और आसन अर्थात बैठने की मुद्रा को मिलाकर बना है. इस योग को करने से लंबाई बढ़ती है. साथ ही पाचन तंत्र मजबूत होता है, शरीर में रक्त संचार सही से होता है, घुटनों, टखनों और भुजाओं में मजबूती आती है. ये एक सरल आसन है, जिसे करना बेहद आसान है. स्वास्थ्य की दृष्टि से ताड़ासन बहुत ही लाभकारी योग है.

अनुलोम विलोम प्राणायाम- सबसे पहले पालथी मार कर सुखासन में बैठें. इसके बाद दाएं अंगूठे से अपनी दाहिनी नासिका पकड़ें और बाई नासिका से सांस अंदर लें लीजिए. अब अनामिका उंगली से बाई नासिका को बंद कर दें. इसके बाद दाहिनी नासिका खोलें और सांस बाहर छोड़ दें. अब दाहिने नासिका से ही सांस अंदर लें और उसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बाई नासिका से सांस बाहर छोड़ दें.

अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे
-फेफड़े मजबूत होते हैं
-बदलते मौसम में शरीर जल्दी बीमार नहीं होता.
-वजन कम करने में मददगार
-पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाता है
-तनाव या डिप्रेशन को दूर करने के लिए मददगार
-गठिया के लिए भी फायदेमंद

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