सावधान ! डेटिंग ऐप रोमांस में ला रहा कमी

boy-dating-girl-300x200पूरी दुनिया डेस्क। प्यार…जब हो जाए तो चैन नहीं… हो गया तो समझना मुश्किल… न हो तो जीना मुश्किल…समझ जाएं तो कहना मुश्किल…और कह दें तो जवाब का अनजाना डर। जिन लोगों को प्‍यार हो चुका है उनसे बेहतर कोई भी नहीं जानता है कि प्‍यार कितना सुंदर और प्‍यारा एहसास है। आपस में एक साथ वक्‍त बिताने का मन होता है, वो एक साथ खुश रहते हैं और ज्‍यादा से ज्‍यादा साथ रहने के बहाने ढूंढते है लेकिन डेटिंग ऐप ने लोगों को इन सब से दूर कर दिया है।

बढ़ रहे हैं यूजर

देश के बड़े शहरों में एक कल्चर शिफ्ट हो रहा है। आज बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड होना न तो खराब माना जा रहा है और न ही ये कोई अचंभे की बात रह गई है। इस कल्चर शिफ्ट को हवा दे रहे हैं लेटेस्ट डेटिंग ऐप। 2 साल पहले टिंडर ऐप से शुरू हुई इस कहानी ने आज कई देसी ऐप को जन्म दिया है और सभी में निवेशक पैसा भी लगा रहे हैं। वू, ट्रूली मैडली और फ्लो जैसे ऐप बड़े तो बड़े कुछ छोटे शहरों में भी तेजी से पकड़ बना रहे हैं।

25 से 35 साल के लोग डेटिंग ऐप पर हैं। ये बताता है कि डेटिंग ऐप नई पीढ़ी की नई सोच की उपज है। कैसा जमाना आ गया है कि मोबाइल फोन पर रिश्ते बन रहे हैं। ऐप के जरिए मिस्टर राइट की तलाश पर जोर दिया जा रहा है। सिर्फ बड़े शहरों में नहीं, बल्कि छोटे शहरों में भी डेटिंग ऐप का चलन बढ़ रहा है। आजकल की पीढ़ी अपना साथी खुद चुनना चाहती है, और यही वजह है कि डेटिंग ऐप का चलन जोर पकड़ रहा है। डेटिंग ऐप नए लोगों से मिलने का नया प्लेटफॉर्म है और 30 फीसदी डेटिंग ऐप यूजर छोटे शहरों से हैं। डेटिंग ऐप ने चुनाव की आजादी है, तो मोबाइल फोन प्राइवेसी देता है। लेकिन, देखने को मिल रहा है कि डेटिंग ऐप पर लड़कियों की तादाद कम है, ऐसे में डेटिंग ऐप्स को कामयाबी के लिए भरोसा बढ़ाने पर फोकस करना होगा

डेटिंग ऐप रोमांस ख़त्म कर रहा है

इतिहासकार और टीवी प्रस्तोता लूसी वर्सली का मानना है कि डेटिंग ऐप के कारण लोगों का मिलना-जुलना इतना आसान हो गया है कि अब रोमांस में वो कशिश नहीं रही। ब्रिटेन के रेडियो टाइम्स से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रेमी जोड़ों में एक दूसरे से मिलने की जो बेताबी होती थी वो अब नहीं होती क्योंकि उन्हें पहले जैसी पाबंदियों और अड़चनों का सामना नहीं करना पड़ता। डेटिंग ऐप टिंडर यूजरों की संख्या तो नहीं बताता लेकिन उसका दावा है कि यहां हर रोज 2 करोड़ 60 लाख जोड़े बनते हैं। साल 2012 में शुरू होने के बाद अब तक यहां 8 अरब से अधिक जोड़े बने हैं। टिंडर काउंसलर और थेरेपिस्ट पीटर सैडिंगटन कहते हैं, “ऐसे कई लोग हैं जो रिश्ता बनाते तो हैं लेकिन उसे आगे जारी नहीं रख पा रहे। मुश्किलों का सामना करने की बजाय वे तुरंत किसी दूसरे की ओर बढ़ जाते हैं।

 

 

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