सायबर अवेयरनेस को लेकर 2 युवाओं की पहल, बताते हैं कैसे करें डिजिटल मीडिया का इस्तेमाल

  • भोपाल.डिजिटल इंडिया के बढ़ते दायरे में सायबर सुरक्षा पर दो युवाओं की पहल गौरतलब है। पहली हैं मुंबई की उद्यमी आकांक्षा श्रीवास्तव। आकांक्षा सायबर स्टॉकिंग का खुलकर सामना करने के लिए महिलाओं और युवतियों को प्रेरित करती हैं। दूसरे है राजधानी के नेहरू नगर निवासी शोभित चतुर्वेदी। शोभित ने बच्चों और युवाओं को सायबर हमलों से बचाने का बीड़ा उठाया है।
    सायबर अवेयरनेस को लेकर 2 युवाओं की पहल, बताते हैं कैसे करें डिजिटल मीडिया का इस्तेमाल
     
    सायबर स्टाकिंग… शिकार हुईं लेकिन नहीं हारी हिम्मत
    सायबर स्टॉकिंग यानी किसी का ऑनलाइन पीछा करना। किसी व्यक्ति पर नजर रखना। उसकी मर्जी के बगैर ईमेल कर, एसएमएस कर परेशान करना। करीब दो साल पहले आकांक्षा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। एआईजी सुदीप गोयनका के मुताबिक आकांक्षा की पसंद-नापसंद का ख्याल रखते हुए एक युवक ने अपनी प्रोफाइल बनाई थी। इससे वे प्रभावित हो गईं और दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई। बाद में पता चला कि युवक ने फेक प्रोफाइल बनाई थी। आकांक्षा इसके खिलाफ खड़ी हुईं और आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचाया। देश के कई बड़े शहरों में उन्होंने ‘आकांक्षा अगेंस्ट हैरासमेंट’ (एएएच) की शुरुआत की है। हाल ही में भोपाल स्थित एक निजी कॉलेज में पहुंचकर उन्होंने सायबर सुरक्षा के बारे में छात्राओं को समझाया। डिजिटल मीडिया का इस्तेमाल कैसे करें, इस बारे में भी बताया।

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    – सायबर दुर्व्यवहार की शर्मिंदगी पीड़ित की नहीं बल्कि दोषी की होती है। सामने आएं, खुलकर बोलें और दुर्व्यवहार करने वाले व्यक्ति को शर्मिंदगी वापस लौटाएं।-आकांक्षा
     
    मकसद…बच्चे अौर युवा सायबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होें
    शोभित की पहचान एथिकल हैकर के रूप में ज्यादा है। उन्होंने सिसको सर्टिफाइड इंजीनियर (सीसीएनए), सर्टिफिकेट ऑफ एथिकल हैकिंग (सीईएच) और रेड हैट सर्टिफाइड इंजीनियर (आरएचसीई) किया है। वर्ष 2010 में उन्होंने सायबर सिक्योरिटी पर काम करना शुरू किया। मप्र पुलिस से वर्ष 2013 में जुड़े। पुलिस उन्हें खासकर तब याद करती है, जब मामला सायबर से जुड़ा हो। फिलहाल वे सायबर पुलिस के साथ काम कर रहे हैं। पुलिस के साथ मिलकर शोभित अब तक 22 स्कूल-कॉलेजों में सायबर अवेयरनेस प्रोग्राम कर चुके हैं। मकसद ये है कि ज्यादा से ज्यादा बच्चे और युवा सायबर एक्ट व सायबर सुरक्षा के प्रति जागरूक हो सकें। इसके लिए उन्होंने अब तक न पुलिस से कोई भुगतान लिया और न ही स्कूल-कॉलेज से।
     
    यह समय इंटरनेट का ही है। इसलिए सरकार को सायबर एजुकेशन पर भी ध्यान देना चाहिए। समय-समय पर इसके लिए प्रोग्राम चलाए जाने चाहिए।-शोभित
     
     
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