सांसदों की सैलरी तय करने के लिए बनेगा कमिशन

parliment_mediumनई दिल्ली (28 सितंबर):केंद्र सरकार ने समय-समय पर सांसदों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की सिफारिश के लिए स्वतंत्र भत्ता कमिशन बनाने का सुझाव दिया है। यह सुझाव संसदीय कार्य मंत्रालय की तरफ से आया है। यह उस अजेंडा नोट का हिस्सा है, जिसे विशाखापत्तनम में दो दिनों तक चलने वाली देशभर के सचेतकों कॉन्फ्रेंस के लिए तैयार किया गया है। यह कॉन्फ्रेंस 29 सितंबर 2015 से शुरू होगी और इसकी अध्यक्ष संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू करेंगे।

संसदीय कार्य मंत्रालय के अजेंडा नोट में कहा गया है, ‘सांसदों के वेतन और भत्तों पर सिफारिश के लिए स्वतंत्र भत्ता कमिशन बनाए जाने से न सिर्फ इन आलोचनाओं को विराम मिलेगा कि सांसद खुद से अपनी सैलरी तय कर लेते हैं, बल्कि लोकतंत्र में उनकी जिम्मेदारियों और अहम रोल पर विचार करने का मौका भी मिल सकेगा।’ कमिशन बनाए जाने पर संसद से जुड़े प्रतिनिधियों की सैलरी को निष्पक्ष, पारदर्शी तरीके से तय किया जा सकेगा। कमिशन बनाने को लेकर सहमति बन जाने पर सरकार का इरादा सांसदों के वेतन, भत्ते और पेंशन से जुड़े कानून में संशोधन करना है।

मंत्रालय ने उन शर्तों की भी सिफारिश की है, जिनका पालन सांसदों की सैलरी तय करने में किया जाना चाहिए। इसके तहत किसी सांसद की सैलरी न तो काफी कम और न ही इतना ज्यादा होनी चाहिए कि यह काम का मुख्य आकर्षण बन जाए। दूसरी बात यह कि सैलरी को जिम्मेदारी के हिसाब से भी तय किया जाना चाहिए। साथ ही, जो लोग संसद में फुल टाइम करियर बनाना चाहते हैं, उन्हें पर्याप्त मुआवजा मिलना चाहिए।

पिछली बार सांसदों की सैलरी 2010 में रिवाइज हुई थी और फिलहाल यह 50,000 रुपये प्रति महीना है।

 
 
 
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