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सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण आज, इस दौरान न करें ये काम वरना उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान

इस सदी के सबसे लंबे चंद्रग्रहण के दौरान शुक्रवार को कई बातों का विशेष खयाल रखना चाहिए। स्कंद पुराण और कई अन्य प्राचीन ग्रंथों में ग्रहणों सेमानव पर होने वाले प्रभावों का विस्तार से वर्णन किया गया है। हालांकि, पौराणिक गाथाओं के अनुसार ग्रहणों को राहु और केतु के प्रसंग से जोड़ा गया है, लेकिन आज के वैज्ञानिक युग में बहुत से लोग इस पर विश्वास नहीं करते हैं। लेकिन हमारी दुनिया से हजारों किलोमीटर ऊपर आसमान में घटित होने वाली अनेक खगोलीय घटनाएं हमारे जीवन में गहरा असर छोड़ती हैं, इस बात से इनकार करना आसान नहीं है। यदि ऐसा ना होता तो हमारे जन्म के समय नक्षत्र और काल की गणना का महत्व क्यों माना जाता। हमारी पूरी जन्मपत्री ही इन नक्षत्रों पर आधारित होती है। इसलिए इसे केवल कपोल कल्पित घटना मानना गलत होगा। पुराणों में चंद्र और सूर्य ग्रहण के दौरान कौन सी सावधानी बरतनी चाहिए, इसके बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया है। इसके अनुसार निम्न कार्योंको करने से सबको बचना चाहिए।

ग्रहण काल में भोजन नहीं करना चाहिए
शास्त्रों के अनुसार ग्रहण से पहले सूतक की अवधि में भोजन नहीं करना चाहिए। कहा गया है कि सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्यजितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुतुन्द नामक नरक में वास करता है। ग्रहण के दौरान खाद्य पदार्थों और पानी में सूक्ष्म जीवाणु एकत्रित होकरउन्हें दूषित कर देते है, जिससे हमें कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं।

इस तरह की हो सकती है परेशानी
आयुर्वेदज्ञों के अनुसार, चंद्र ग्रहण में हमारे पेट की पाचन-शक्ति कमजोर हो जाती है, जिससे बहुत से लोगों को अपच और अजीर्ण जैसी शिकायतें हो सकती हैं। इससे बचने के लिए कुछ उपाय भी बताए गए हैं। ग्रहण से हमारी जीवन शक्ति का ह्रास होता है और तुलसी के पत्तों में प्राण शक्ति मानी जाती है। इसलिए ग्रहण काल में खाद्य प्रदूषण को समाप्त करने के लिए भोजन तथा पीने के पानी में तुलसी के कुछ पत्ते डाल दिए जाते हैं। इसके प्रभाव से न केवल भोज्य पदार्थ, बल्कि आटा आदि भी प्रदूषण से मुक्त बने रह सकते हैं।

गर्भवती स्त्रियों के लिए विशेष परहेज
गर्भवती स्त्री को चंद्र ग्रहण नहीं देखना चाहिए, क्योंकि ग्रहण का दुष्प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़ने का डर रहता है। गर्भवती के गर्भ पर गोबर और तुलसी कालेप भी लगा दिया जाता है ताकि ग्रहण का कुप्रभाव उस पर ना पड़े।

शारीरिक संबंध न बनाएं
ग्रहण की अवधि में अभ्यंग यानी तेल की मालिश, मैथुन और शारीरिक संबंध आदि न करने की सलाह भी दी जाती है। इसके पीछे मान्यता यह है कि यदि ग्रहण के दौरान कोई महिला गर्भवती हो जाए तो नवजात दिव्यांग या मानसिक रूप से कमजोर पैदा होता है। साथ ही गर्भवती महिलाओं पर ग्रहण की छाया पड़ना अशुभ माना जाता है।

ग्रहण में देव पूजा नहीं करनी चाहिए
किसी भी प्रकार के ग्रहण के दौरान मदिरों के द्वार बंद कर दिए जाते हैं क्योंकि शास्त्रों में देव मूर्ति के स्पर्श और पूजा की मनाही बताई गई है। ग्रहण के समय केवल मानसिक जाप और ईश्वर की आराधना करनी चाहिए। यदि चंद्रग्रहण हो तो ग्रहण के पूरे समय में ‘ओम श्रीचंद्रमसे नम:’ का जाप करते रहनाचाहिए। ग्रहण के बाद स्नान करके शरीर की शुद्धि कर लेनी चाहिए।

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