शिक्षामित्रों के मुद्दे पर प्रियंका ने यूपी सरकार को बनाया निशाना, पलटवार कर योगी ने दिया ये बयान

शिक्षामित्रों के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष में नूराकुश्ती का दौर सोमवार को भी जारी रहा। इस मुद्दे पर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने योगी सरकार को घेरा। वहीं, सरकार की ओर से भी कहा गया कि वर्ष 2004-14 के बीच सत्ता में रहने पर कांग्रेस ने इस तरफ क्यों ध्यान नहीं दिया।शिक्षामित्रों के मुद्दे पर प्रियंका ने यूपी सरकार को बनाया निशाना, पलटवार कर योगी ने दिया ये बयान

प्रियंका ने सोमवार को ट्वीट किया-‘उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों की मेहनत का रोज अपमान होता है। सैकड़ों पीड़ितों ने आत्महत्या कर ली। जो सड़कों पर उतरे, सरकार ने उन पर लाठियां चलाईं। रासुका के तहत केस दर्ज किया। भाजपा के नेता टी-शटों की मार्केटिंग में व्यस्त हैं। काश वे अपना ध्यान दर्दमंदों की ओर भी डालते।’ प्रियंका ने ट्वीट के माध्यम से अनुदेशकों का मुद्दा भी उठाया। 

वह लिखती हैं-‘मैं लखनऊ के कुछ अनुदेशकों से मिली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने उनका मानदेय 8,470 रुपये से बढ़ाकर 17 हजार रुपये की घोषणा की थी। मगर आज तक अनुदेशकों को मात्र 8,470 रुपये ही मिलता है। सरकार के झूठे प्रचार का शोर है, लेकिन अनुदेशकों की आवाज गुम हो गई।’

सत्ता में थी तो क्यों सोई थी कांग्रेस : सरकार

इस मामले में योगी सरकार की ओर से मोर्चा मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने संभाला। उन्होंने प्रियंका को टैग करते हुए ट्वीट किया-‘आप पहले इस बात का जवाब दीजिए कि शिक्षामित्रों की सुविधाओं को लेकर 2004 से 2014 तक केंद्र की कांग्रेस सरकार क्यों सोती रही। राजनीति की जल्दबाजी में अपनी जिम्मेदारियों से मत भागिए।’ मौजूदा केंद्र की मोदी और राज्य की योगी सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय 3500 रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया। उनकी निष्पक्ष भर्ती की प्रक्रिया शुरू की। शिक्षक चयन में 25 फीसदी का वेटेज दिया। शिक्षामित्रों को उनके गृह जनपद में ही तैनाती दी गई।

बसपा और सपा को भी इस बारे में बोलने का बिल्कुल अधिकार नहीं है। क्योंकि, 10 वर्षों में बसपा-सपा सरकारों ने शिक्षामित्रों की समस्या को सिर्फ और सिर्फ बढ़ाया है। इन्होंने अवैध तरीके से जाति-धर्म के नाम पर शिक्षामित्रों की भर्ती की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

राजनीतिक दल क्यों नहीं देते समस्या का वास्तविक हल

शिक्षामित्र संगठनों के नेता अनिल यादव और दुष्यंत चौहान कहते हैं कि राजनीतिक दल शिक्षामित्रों के मुद्दे पर राजनीति तो खूब कर रहे हैं, पर वास्तविक हल नहीं सुझाते। उनका कहना है कि हम सुप्रीम कोर्ट से केस हार चुके हैं। सरकार की नीति के तहत हमें काम पर रखा गया। अब राहत भी कानून बनाकर सरकार हमें दे सकती है। जब धर्म से संबंधित मामलों में कानून बनाया जा सकता है, तो हमारे मामले में ऐसा करने का स्पष्ट वादा राजनीतिक दल क्यों नहीं कर रहे हैं। 
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