शराब खरीदने पर रसीद क्यों नहीं मिलती?, आपके होश उड़ा देगी इसकी वजह

बड़ी ही अजीब और चौंकाने वाली बात है कि शराब खरीदने वालों को इसकी रसीद (Receipt) नहीं दी जाती। शराब की दुकानों से लोग पैसे देकर बोतलें तो खरीद लेते हैं लेकिन दुकानदार उन्हें कभी रसीद नहीं देता। आज हम आपको बताते हैं ‘रसीद के पीछे का गोरखधंधा’।

शराब की दुकानें बिना खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन के लाइसेंस से चल रही हैं। कभी भी जांच के लिए शराब का सैंपल नहीं भरा गया। साथ ही शराब दुकानदार शराब खरीदने पर उसकी रसीद भी नहीं देते है। अगर कोई उपभोक्ता उनसे रसीद मांगता भी है तो उसको रसीद नहीं दी जाती है। सभी शराब की दुकानदार यह ‘खेल’ करते है। जिसके चलते शराब पीने वालों को मजबूरी में बिना रसीद के ही शराब खरीदनी पड़ती है।
उपभोक्ता संरक्षण नियम के तहत हर दुकानदार को उपभोक्ता को सामान खरीदने पर रसीद (बिल) देने का नियम बनाया गया है। अधिकारियों को भी इसके बारे में मालूम है, लेकिन किसी अधिकारी ने शराब दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। दरअसल शराब और बीयर के ठेकों में कोई कानून नहीं चलता। बार में मांगने पर ही पक्की रसीद मिलती है। मॉडल शॉप पर मांगने पर भी नहीं दी जाती। इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता भानू प्रताप सिंह का कहना है कि शराब पीने से किसी को कुछ हो जाता है तो वह तभी दुकानदार पर क्लेम ले पाएगा जब उसके पास शराब खरीदने की रसीद हो। उपभोक्ता बिना रसीद के केस तो कर सकता है, लेकिन वह बिना रसीद के यह सिद्ध नहीं कर पाएगा कि उसने दुकान से शराब खरीदी थी। इसलिए शराब या अन्य कोई भी सामान खरीदने पर पक्की रसीद (बिल) जरूर लेना चाहिए।
बिल न देकर दोहरा फायदा उठा रहे
शराब के दुकानदार को बिल न देने से दोहरा फायदा होता है। वह रसीद न देकर टैक्स (कर) चोरी कर सरकारी खजाने में चपत लगा रहे हैं। इसकी आड़ में हरियाणा की शराब भी बेचते हैं। साथ ही शराब दुकानदार ग्लास, पानी से लेकर नमकीन भी बेचते है। वे इसकी भी कोई रसीद नहीं देते है।
मंडलीय अधिकारी आरपी सिंह ने कहा कि कोई भी सामान खरीदते समय रसीद जरूर लेना चाहिए। कोई भी दिक्कत होने पर हमारा विभाग तभी कार्रवाई कर सकता है। जब उपभोक्ता के पास रसीद हो।
जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने कहा कि अगर कोई शराब खरीदने की रसीद मांगता है तो शराब दुकानदारों को रसीद देनी चाहिए। रसीद न देने और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन का विभाग लाइसेंस बनवाए जाने पर मामला दिखवाएंगे। एक्ट के तहत उसका अनुपालन करवाया जाएगा।





