लोकसभा चुनाव 2019: …तो क्या कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में खिल पाएगा ‘कमल’

छिंदवाड़ाः छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश की उन लोकसभा सीटों में से एक है, जिस पर कांग्रेस के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का राज है. कमलनाथ इस सीट से 1980 से लोकसभा चुनाव जीतते आ रहे हैं. छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से CM कमलनाथ को सिर्फ 1997 में हार का मुंह देखना पड़ा था, लेकिन इसके बाद उनकी जीत का सिलसिला कायम रहा. यही नहीं 2014 में मोदी लहर के बावजूद छिंदवाड़ा में कमलनाथ के गढ़ को कोई नहीं भेद सका. अपने कार्यकाल के दौरान कमलनाथ ने भी छिंदवाड़ा के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ी और शहर में रोड से लेकर शिक्षा के क्षेत्र में कई कार्य किए.लोकसभा चुनाव 2019: ...तो क्या कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में खिल पाएगा 'कमल'

2014 के राजनीतिक समीकरण
छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर 2014 में कांग्रेस के कद्दावर नेता और मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जीत दर्ज कराई. उन्होंने भाजपा प्रत्याशी चौधरी जयभान सिंह को करीब 1,16,220 वोटों के अंतर से हराया था. 2014 के लोकसभा चुनाव में कमलनाथ को 5,59,755 वोट मिले, जबकि चौधरी जयभान सिंह को 4,43,218 वोट ही मिल सके.

राजनीतिक इतिहास
छिंदवाड़ा में पहला लोकसभा चुनाव 1951 में हुआ. जिसमें कांग्रेस के रायचंद भाई शाह ने जीत दर्ज कराई. इसके बाद 1957 और 1962 में भी कांग्रेस को ही छिंदवाड़ा में जीत मिली. 1967, 1971 और 1977 में इस सीट से गौरीशंकर गार्गी ने इस सीट पर जीत हासिल की. वहीं 1980 में इस सीट पर कमलनाथ की एंट्री हुई, जिसके बाद उन्होंने लगातार 3 लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कराई.

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इसके बाद 1996 में हवाला कांड में नाम आने पर उन्हें कांग्रेस से टिकट नहीं मिला, जिसके बाद उनकी पत्नी अलका नाथ ने छिंदवाड़ा की कमान संभाली और चौधरी चंद्रभान सिहं को मात देते हुए छिंदवाड़ा की सांसद चुनी गईं. 1997 में हुए उपचुनाव में कमलनाथ को बीजेपी के दिग्गज नेता सुंदरलाल पटवा से शिकस्त खानी पड़ी, लेकिन इसके बाद 1998 में हुए चुनाव में कमलनाथ ने वापसी की और इसके बाद 1998 से लेकर अब तक छिंदवाड़ा की जनता कमलनाथ को ही अपना नेता चुना. 

सांसद का रिपोर्ट कार्ड
कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ के संसदीय क्षेत्र के विकास की बात की जाए तो अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने रोड से लेकर शिक्षा तक में छिंदवाड़ा को काफी ऊंचे मुकाम पर पहुंचाया है, जिससे क्षेत्र की जनता भी उनसे काफी खुश है. मुख्यमंत्री बनने से पहले तक संसद में उनकी उपस्थिति 60 प्रतिशत रही. वहीं क्षेत्र के विकास के लिए उन्हें 25 करोड़ आवंटित हुए, जिसमें से उन्होंने 21 करोड़ से अधिक राशि क्षेत्र के विकास कार्यों में खर्च कर दी.

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