लालकिले के अंदर मिला कारतूसों का जखीरा व कई हैंड ग्रेनेड,

लाल किले के भीतर कारतूस और विस्फोटक ऐसे कोने में मिले हैं जहां आमतौर पर कोई आता-जाता नहीं है। ऐसा लग रहा है जैसे उन्हें यहां छुपाकर रखा गया था।

लालकिले के अंदर मिला कारतूसों का जखीरालालकिले के अंदर भारी संख्या में राइफल्स के कारतूस और कुछ हैंड ग्रेनेड मिलने ने सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के मुताबिक, लालकिले में पुरातत्व विभाग की सफाई के दौरान रविवार को कारतूसों का ढेर और हैंड ग्रेनेड मिले थे। यह भी हैरानी की बात है कि ये कारतूस और विस्फोटक ऐसे कोने में मिले हैं जहां आमतौर पर कोई आता-जाता नहीं है। ऐसा लग रहा है जैसे उन्हें वहां छुपाकर रखा गया था। कारतूस इतने ज्यादा हैं कि पुलिस भी पूरे मामले पर सकते में है। डीसीपी (नॉर्थ) जतिन नरवाल ने विस्फोटक मिलने की पुष्टि की है। एनएसजी का बम डिस्पोजल स्क्वॉड मौके पर है। एनएसजी और आर्मी के अधिकारी भी जांच में शामिल हैं।

वहीं, जांच में जुटी दिल्ली पुलिस का कहना है कि ये कारतूस और विस्फोटक एक्सपायरी हैं। शुरुआती जांच में यह भी मान कर चला जा रहा है कि लालकिले के अंदर किसी समय सैनिक रहा करते थे। ऐसे में हो सकता है कि कारतूस और विस्फोटक उसी समय छूटे हों।

लालकिले के अंदर मिला कारतूसों का जखीरासवाल सूत्रों का कहना है कि लाल किले के अंतर कारतूस और हैंड ग्रेनेड का मिलना सुरक्षा में बड़ी चूक देखा जा रहा है। हैरानी की बात यह भी है कि 15 अगस्त को लालकिले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन हुआ था। कुछ दिन पहले ही यानी 26 जनवरी से पहले पुलिस ने पूरी दिल्ली में चप्पे-चप्पे की तलाशी और सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता होने का दावा भी किया था। यह भी पढ़ेंः गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल गई दिल्ली, एन्काउंटर में इनामी बदमाश गिरफ्तार|

चिंता की यह भी है बड़ी वजह:

याद दिला दें कि 17 साल पहले (22 दिसंबर 2000) को लालकिले पर ही आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के आतंकियों ने हमला करके एके-47 से अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं, जिसमें तीन जवानों की मौत हो गई थी। ऐसे में लालकिले के अंदर भारी मात्रा में कारतूस और विस्फोटक मिलना सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठा रहा है।

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