राहुल गांधी का चुनाव से पहले बड़ा ऐलान, इस सबसे बड़ी योजना का किया ऐलान

कांग्रेस किसान के कर्जमाफी एलान के जरिए मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव जीतने में सफल रही थी. यही वजह है कि राहुल गांधी लोकसभा चुनाव 2019 को फतह करने के लिए ‘NYAY’ का ऐलान किया है.

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एयर स्ट्राइक के बाद कांग्रेस बैकफुट पर नजर आ रही थी और बीजेपी के हौसले बुलंद थे. ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने न्यूनतम आय स्कीम (NYAY) के रूप में बड़ा दांव चला है. माना जा रहा है कि कांग्रेस इस योजना के जरिए सीधे तौर पर देश के 25 करोड़ लोगों को साधने की कोशिश की है, जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने न्यूनतम गारंटी योजना का वादा किया, जिसके तहत कांग्रेस अगर सत्ता में आती है तो हर किसी को 12 हजार रुपये प्रति महीने कांग्रेस सरकार देगी. राहुल गांधी ने कहा कि पांच साल तक मोदी सरकार में गरीब दुखी रहे हैं. ऐसे में अब हम उन्हें न्याय देंगे. राहुल ने कहा कि हमने मनरेगा कमिट किया था और अब आय गारंटी देकर दिखा देंगे.

राहुल ने कहा कि हम गरीबी मिटा देंगे. हमारा कहना है कि अगर आप काम कर रहे हो तो महीने में 12 हजार रुपए से आय कम से कम होनी चाहिए. हिंदुस्तान में अगर मिनिमम इनकम से कम आमदनी है तो यह आय बढ़ाने की कोशिश होगी. जिससे गरीबी से निकाला जा सकता है. यह सेकेंड फेज में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से निकाल देगी. इस योजना को हम आगे लाकर दिखाएंगे.

नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री की पॉलिटिक्स से दो हिंदुस्तानी झंडा है. एक अनिल अंबानी झंडा और दूसरा गरीबी के लिए. 21वीं सदी में हिंदुस्तान में इस देश में गरीबी को हटाना है. यह स्कीम नहीं है, यह अब गरीबी पर आखिरी पड़ाव है. उन्होंने कहा कि हम दो हिंदुस्तान नहीं बनने देंगे, यह अमीरों और गरीबों दोनों का ही देश होगा. ऐसे में गरीबों को भी इज्जत दिलाना चाहता हूं.

कांग्रेस की कवायद इस योजना के सहारे आगामी चुनावों में गरीब तबके के वोट के लुभाने की है. ऐसे में सवाल है कि ‘न्यूनतम आय योजना’ (NYAY) के लागू करने के बाद देश से गरीबी का नामोनिशान क्या मिट जाएगा? राहुल गांधी की दादी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1971 में गरीब हटाओ का नारा दिया था. इसका चुनाव में कांग्रेस को फायदा भी मिला था. ऐसे में कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में 2019 में सियासी लाभ मिलेगा, ये देखना होगा.

दरअसल आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 द्वारा दिए गए मॉडल के मुताबिक देश में गरीबी रेखा का आंकलन उचित ढंग से नहीं किया गया है. जहां तेंदुलकर फॉर्मूले से 22 फीसदी जनसंख्या को गरीब बताया गया, वहीं इसके बाद हुए सी रंगराजन फॉर्मूले ने 29.5 फीसदी यानि 36.3 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा के नीचे बताया. वहीं प्रति व्यक्ति खर्च के स्तर को भी 2012 में 27.2 रुपये से सुधार कर 2014-15 में 32 रुपये कर दिया गया. जबकि शहरी इलाकों के लिए इस खर्च को 33.3 रुपये से बढ़ाकर 47 रुपये प्रति व्यक्ति कर दिया गया.

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