योगी के नए फैसले से लखनऊ के टुंडे कबाबी पर बंदी का खतरा

उत्तर प्रदेश सरकार के अवैध बूचड़खाने बंद करने के फरमान के बाद प्रदेश भर में प्रशासन और पुलिस अभियान चलाए जा रहे हैं. अभी तक दर्जनों अवैध बूचड़खाने बंद हो चुके हैं, वहीं कई जगह लोगों द्वारा खुद ही बूचड़खाने बंद करने की सूचना है.इसका सीधा असर बीफ सहित अन्य गोश्त की सप्लाई पर पड़ रहा है.स्थिति ये है कि लखनऊ की पहचान माने जाने वाले टुंडे कबाबी पर बंदी का संकट खड़ा हो गया है. टुंडे ही नहीं नवाबों की नगरी में बिरयानी, कुल्चे निहारी आदि के स्वाद के लिए प्रसिद्ध अन्य दुकानों के व्यापार पर सीधा असर पड़ता दिख रहा है.चौक के अकबरी गेट पर स्थित टुंडे कबाबी के अबु बक्र कहते हैं कि सप्लाई पूरी तरह से ठप हो चुकी है. ऐसी स्थिति थी कि बुधवार को दुकान बंद तक करनी पड़ गई. आज गुरुवार को हमने दुकान खोली है

लेकिन बीफ के कबाब की जगह हम चिकन के कबाब ग्राहकों के सामने पेश कर रहे हैं.यही नहीं थोड़ मटन भी अरेंज किया है, जिसका कबाब बनाएंगे. दुकान में इसके लिए अलग से स्टीकर भी चिपका दिए हैं. अबु बक्र कहते हैं कि लेकिन दिक्कत ये है कि हमारी पहचान के बीफ कबाब की मांंग इतनी ज्यादा है लेकिन लोगों को चिकन के कबाब समझ में ही नहीं आ रहे हैं.अगर यही स्थिति रही तो धंधा बंद ही करना पड़ जाएगा. अबु बक्र कहते हैं कि आज तक के इतिहास में टुंडे कबाबी की दुकान कभी खाली नहीं रही. आप खुद ही देख लीजिए, इक्का-दुक्का ग्राहक ही बैठे हैं.अवैध बूचड़खानों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, वैध से तो आपको सप्लाई हो रही होगी?इस सवाल पर अबु बक्र ने साफ किया कि बहुत कंफ्यूजन है. प्रशासन इसको लेकर स्थिति साफ नहीं कर रहा.

अवैध कौन और वैध कौन ये नहीं बताया जा रहा. ये ही कारण है कि मामले में सभी बूचड़खाने वाले काम रोक चुके हैं. शाम तक निर्णय ले लिया जाएगा कि मामले में आगे बूचड़खानों की तरफ से क्या कार्रवाई होनी है.अकबरी गेट पर ही कुल्चे और निहारी के लिए प्रसिद्ध रहीम्स के मालिक मोहम्मद ओसामा ने कहा कि बूचड़खानों के खिलाफ कार्रवाई से हमारे यहां धंधे पर सीधा असर पड़ रहा है. बीफ मिलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. यही नहीं बिक्री में भी बहुत ज्यादा गिरावट हो गई है.

तरह-तरह की अफवाहें फैल रही हैं, कोई बता रहा है कि बूचड़खाने वाले हड़ताल पर जा रहे हैं, तो कोई कह रहा है कि दुकानों पर पुलिस रेड मारेगी.नेपियर रोड पर अलिश्मा फूड्स के यासिर अब्बास भी मीट की शॉर्टेज की बात कह रहे हैं.उनके अनुसार किसी तरह से कुछ माल उन्होंने जुटाया है. दिक्कत ये है कि माल ताजा होना जरूरी है, इसलिए हम उसे स्टॉक भी नहीं कर सकते क्योंकि ये स्वाद का व्यापार है. माल इतना भी नहीं मिला है कि सभी ग्राहकों को संतुष्ट कर सकें. किसी तरह काम चलाया जा रहा है.

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