मेनका के खिलाफ बगावत करने वाले विधायकों के बदले सुर, पार्टी के पक्ष में कही ये बात

स्थानीय प्रत्याशी का मुद्दा उठाकर रविवार को मेनका और वरुण का विरोध करने वाले विधायकों को पार्टी हाईकमान की फटकार के बाद बैकफुट पर आ गए हैं। अब वे कह रहे हैं कि हाईकमान का जो भी फैसला होगा, वह उन्हें मान्य होगा।

दरअसल, पार्टी के जनपदीय नेतृत्व ने कल रात (रविवार) ही हाईकमान को इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट भेज दी थी। इसमें पार्टी फोरम के बजाय सार्वजनिक रूप से अपनी बात कहने वालों के खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्रवाई करने की सिफारिश की गई थी। बताते हैं कि हाईकमान ने इस मामले के संज्ञान में आने के तुरंत बाद ही बगावती तेवर दिखाने वालों के पेच कसने शुरू कर दिए। 

इसी का नतीजा रहा कि बगावत के झंडाबरदारों में से ज्यादातर अब बैकफुट पर आ गए हैं और टिकट पर हाईकमान के निर्णय को ही मानने की बात कह रहे हैं। रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहे सभी विधायक सोमवार को विरोध की बात से साफ मुकर गए हैं। उनका यह कहना कि स्थानीय प्रत्याशी की बात कहना कोई गुनाह नहीं था, लेकिन पार्टी जिसे भी टिकट देगी उसे चुनाव लड़ाएंगे, यह साबित करता है कि हाईकमान की फटकार के बाद विरोध को दरकिनार कर दिया गया है।

हाईकमान को संदेह था कि अगर चुनाव के इस संवेदनशील मौके पर किसी के खिलाफ कार्रवाई की गई तो हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं। लिहाजा बातचीत और कार्रवाई का खौफ दिखाकर ही मामला निपटाने की कोशिश की गई।

मैं पार्टी का सच्चा सिपाही
मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूं। पार्टी जिसे भी अपना प्रत्याशी बनाएगी, मैं उसे अपनी विधानसभा से भारी मतों से जिताकर भेजूंगा। 

पार्टी को निर्णय सर्वोपरि 
भाजपा जिलाध्यक्ष का जो दायित्व था, उन्होंने उसे निभाया। मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जनता की बात रखी। फिलहाल पार्टी जो निर्णय लेगी, वह मेरे लिए मान्य होगा। 

मेरे लिए पार्टी बड़ी 
पार्टी बड़ी है। मैं पार्टी का एक जिम्मेदार सिपाही हूं। पार्टी का निर्णय सर्वमान्य होगा। मैं किसी व्यक्ति विशेष की बात नहीं करता। मेरे लिए कमल का फूल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मायने रखते हैं। 

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