मीट निर्यातकों को डर, बैन लगा तो होगा 3 अरब डॉलर का व्यापार प्रभावित

beef-1-560f8cb83850e_lराजधानी दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के दादरी इलाके में कथित गोमांस खाने की अफवाह के चलते अल्पसंख्यक समुदाय के एक शख्स की हुई हत्या के बाद से मीट निर्यातक इंडस्ट्री को भय है कि इस मामले को लेकर नेताओं की ओर से जारी  राजनीतिक बयानबाजी का असर उनके उद्योग पर पड़ेगा।

जानकारी के अनुसार भारत का मीट निर्यात उद्योग सालाना 6.2 अरब डॉलर का है। इसमें से आधा हिस्सा केवल उत्तर प्रदेश का है।निर्यातकों को डर है कि अगर बीफ का एक्सपोर्ट प्रभावित होता है तो करोड़ों का नुकसान तो होगा ही साथ ही लाखों लोगों की नौकरियों पर संकट के बादल छा सकते हैं।

निर्यातकों के मुताबिक वह जिस मांस का एक्सपोर्ट करते हैं, वह गाय का नहीं बल्कि भैंस का होता है। अल- अरहम मीट एक्सपोर्ट के मालिक मोहम्मद फरदीन कहते हैं कि निर्यातक चिन्ता में हैं।

 लाखों लोग इस व्यवसाय में लगे हुए हैं। निर्यात पर प्रतिबंध लगा तो इसका बुरा असर होगा। मीट निर्यातक इंडस्ट्री को बड़ी मात्रा में राजस्व मिलता है।

हम विश्व के सबसे बड़े निर्यातक हैं। सरकार को उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए जिनकी रोजी-रोटी इसी पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं के लिए गाय पवित्र है, लेकिन भैंस नहीं। बीफ एक्सपोर्ट में भैंस का मीट होता है।

गौरतलब है कि शुक्रवार को यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए कहा था कि बीफ के एक्सपोर्ट को बंद करके दिखाएं।

 

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