यूपी में हुआ महागठबंधन तो बसपा, भाजपा के लिए बढ़ेगी चुनौती

सूबे में यदि सपा, कांग्रेस व अन्य क्षेत्रीय दलों में महागठबंधन हुआ तो बसपा और भाजपा को भी अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। विभिन्न दलों के घोषित प्रत्याशियों व टिकट के दावेदारों की चुनौती और बढ़ सकती है। कई घोषित प्रत्याशियों का पत्ता भी कट सकता है। इससे सपा के घोषित प्रत्याशियों के भी कान खड़े हो गए हैं।
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महागठबंधन हुआ तो बसपा, भाजपा के लिए बढ़ेगी चुनौती
कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) की सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से दो बार मुलाकात और अब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा सपा-कांग्रेस के गठबंधन के लिए राजी होने पर दूसरे क्या कर लेंगे, जैसे बयान से गठबंधन की अटकलों को और बल मिला है। अगर यह कवायद परवान चढ़ती है तो बसपा को नए सिरे से सीटवार समीकरण देखने पड़ेंगे।
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जानकारी के मुताबिक बसपा लगभग सभी सीटों पर प्रभारी के रूप में अपने प्रत्याशी का एलान कर चुकी है। बसपा सुप्रीमो मायावती लगातार घोषित प्रत्याशियों की गतिविधि पर नजर रखती हैं। वह समय-समय पर कहती रही हैं कि घोषित प्रत्याशियों के टिकट नहीं बदले जाएंगे।
इसके बावजूद वह प्रत्याशी की सक्रियता, चुनाव में उसके जीत की संभावना और दूसरे दल द्वारा घोषित प्रत्याशी के सामने आने पर सीट के जातीय समीकरण पर पड़ रहे असर जैसे विभिन्न कारणों के आधार पर बड़े पैमाने पर प्रत्याशियों में बदलाव कर चुकी हैं। पिछले कुछ महीनों में अपर कास्ट के कई प्रत्याशी बदलकर मुस्लिम प्रत्याशी उतारे गए हैं। फैजाबाद, बाराबंकी सहित कई जिलों में पिछले महीने ही कई प्रत्याशी बदले गए हैं।





