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मध्यप्रदेश: एग्जिट पोल में टकराए भाजपा-कांग्रेस, लेकिन ये 54 सीटें जीतने वाला बनाता है सरकार

मध्यप्रदेश में इस बार बंपर वोटिंग हुई। चुनाव को लेकर 10 एग्जिट पोल आए हैं। इनमें से चार के मुताबिक भाजपा और दो के मुताबिक राज्य में कांग्रेस की सरकार बन सकती है। जबकि चार पोल कांटे की टक्कर बता रहे हैं।

करीबी मुकाबला: इंडिया न्यूज-नेता एग्जिट पोल, इंडिया टुडे- एक्सिस माय इंडिया, न्यूज 24 और न्यूज नेशन
कांग्रेस की जीत: एबीपी और रिपब्लिक-सी वोटर सर्वे
भाजपा की जीत: टाइम्स नाउ- सीएनएक्स, रिपब्लिक-जन की बात, जी न्यूज और इंडिया टीवी

इन सब के बीच दोनों ही पार्टियों के नेताओं के अपने दावे हैं। एग्जिट पोल उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखने पर कुछ नेता इसे गलत तो वहीं कुछ पोल में मिली सीटों से भी अधिक सीटें जीतने का अनुमान लगा रहे हैं। चुनावी पंडितों की मानें तो प्रदेश की 54 सीटें ऐसी हैं जहां कब्जा करने वाला हीं प्रदेश की सत्ता पर काबिज हो सकता है।
रोमांचक मुकाबले वाली सीटें

भोपाल दक्षिण-पश्चिम- यह सीट प्रतिष्ठा की सीट बन चुकी है। भाजपा के विधायक उमाशंकर गुप्ता और कांग्रेस के पूर्व विधायक पीसी शर्मा के बीच कांटे की टक्कर रही। यह भोपाल की सबसे ज्यादा चर्चित सीट बनी हुई है।

भोपाल मध्य – यहां भाजपा के वर्तमान विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह को कांग्रेस के आरिफ मसूद से कांटे की टक्कर मिल रही है। आंकड़े बताते हैं कि हिंदू-मुस्लिम मतदाता यहां की जीत-हार तय करते हैं। आरिफ ने यहां से पिछला चुनाव भी लड़ा था जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

अटेर – भाजपा के अरविंद भदौरिया का मुकाबला कांग्रेस से वर्तमान विधायक हेमंत कटारे से है। क्षेत्र में जातिगत समीकरण का भी गहरा प्रभाव है। इस वजह से यह सीट भी चर्चा में है।

अमरवाड़ा – यहां से भाजपा के प्रेमनारायण ठाकुर और कांग्रेस से वर्तमान विधायक कमलेश शाह मैदान में हैं। गाेंडवाना गणतंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता मनमोहन शाह बट्टी भी यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। वे 2003 में गोंगपा से विधायक रह चुके हैं।

भोजपुर – यहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी की सीधी टक्कर भाजपा के वर्तमान विधायक सुरेंद्र पटवा से है। पिछले चुनाव में पटवा ने पचौरी को पटखनी दी थी। इस सीट पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं

सांची – भाजपा के वरिष्ठ नेता गौरीशंकर शेजवार के बेटे मुदित शेजवार ने यहां से पहली बार चुनाव लड़ा। उनका मुकाबला कांग्रेस के प्रभुराम चौधरी से है। यह सीट भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

सिलवानी – भाजपा सरकार में मंत्री रामपाल सिंह का मुकाबला कांग्रेस के देवेंद्र पटेल से रहा। इस सीट पर कांटे की टक्कर होने की वजह से मतदाताओं की नजर हैं।

विदिशा – यह सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है। यहां मुकेश टंडन की सीधी टक्कर कांग्रेस के शशांक भार्गव से रही। आप प्रत्याशी पूर्व विंग कमांडर अनुमा आचार्य के यहां से मैदान के उतरने के कारण मुकाबले ने त्रिकोणीय रूप अपना लिया।

खुरई – गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह का मुकाबला कांग्रेस के अरुणोदय चौबे से हाेने से यह सीट चर्चा में है। यहां भी दोनों के बीच कांटे का मुकाबला रहा। बुंदेलखंड अंचल की यह सीट चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

चाचौड़ा – इस सीट पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि यहां पर कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह और भाजपा से विधायक ममता मीना का आमने-सामने का मुकाबला है।

होशंगाबाद – यहां भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा और टिकट ना मिलने के कारण कांग्रेस का दामन थामने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे सरताज सिंह के बीच मुकाबला है। दोनों ही उम्मीदवारों की क्षेत्र में अच्छी पकड़ है।

इंदौर-3 से आकश विजयवर्गीय मैदान में हैं

इंदौर 1 – भाजपा ने यहां के वर्तमान विधायक सुदर्शन गुप्ता को फिर मौका दिया। उनका मुकाबला कांग्रेस के संजय शुक्ला से हुआ। यहां भी दोनों प्रत्याशियों के बीच आमने-सामने का मुकाबला रहा।

इंदौर 3 – भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश यहां से पहली बार चुनाव मैदान में हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेश जोशी के भतीजे अश्विन जोशी से है। दोनों ही यहां पूरी ताकत लगा रहे हैं। यह सीट पर प्रदेश भर में चर्चा में है।

इंदौर 5 – यहां से भाजपा से वर्तमान विधायक महेंद्र हार्डिया और कांग्रेस के सत्यनाराण पटेल के बीच कांटे का मुकाबला है।

मैहर – भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी का मुकाबला कांग्रेस के श्रीकांत चतुर्वेदी से है। बसपा और सपा के प्रत्याशी भी दोनों दलों के नेताओं के लिए चुनौती बने हुए हैं।

छतरपुर – इस सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे सत्यव्रत चतुर्वेदी के भाई आलोक चतुर्वेदी और भाजपा की अर्चना सिंह का मुकाबला रहा। भाजपा में मंत्री ललिता यादव ने यहां से अपनी सीट बदली थी।

वारासिवनी – कांग्रेस ने इस सीट से मुख्यमंत्री के साले संजय मसानी को मैदान में उतारा। भाजपा से योगेंद्र निर्मल चुनाव लड़ रहे हैं। वे यहां से विधायक भी हैं। मसानी के चुनाव लड़ने के कारण यह सीट चर्चा में है।

कालापीपल – कांग्रेस ने यहां से युवा कांग्रेस के कुणाल चाैधरी पर भरोसा जताया। भाजपा से बाबूलाल वर्मा प्रत्याशी थे। यहां भी दाेनों दलों के प्रत्याशियों के बीच रोचक मुकाबला है।

मुरैना – भाजपा के वरिष्ठ नेता रुस्तम सिंह का मुकाबला कांग्रेस के रघुराज सिंह कसाना और बसपा के बलवीर सिंह दंडोतिया से है। यहां त्रिकोणीय मुकाबला होने से सीट चर्चा में है।

राजनगर – यह सीट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे नितिन चतुर्वेदी के सपा से चुनाव लड़ने की वजह से चर्चा में है। यहां से भाजपा के प्रत्याशी अरविंद पटेरिया और कांग्रेस से विक्रम सिंह नातीराजा हैं। वे यहां से विधायक भी हैं।

घटि्टया – यहां से भाजपा ने कांग्रेस के नेता रहे प्रेमचंद गुड्डू के बेटे अजीत बौरासी को टिकट दिया। कांग्रेस से रामलाल मालवीय मैदान हैं। भाजपा के वर्तमान विधायक का टिकट कटने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी रही। इस वजह से यह सीट भी उलझी हुई है।

नागौद – भाजपा ने यहां से नागेंद्र सिंह और कांग्रेस ने यादवेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है। जातिगत समीकरण की वजह से यहां दोनों में कांटे की टक्कर रही।

दमोह – वित्त मंत्री जयंत मलैया की टक्कर कांग्रेस के राहुल सिंह लोधी से है। लेकिन उनके लिए भाजपा से ही बागी हुए रामकृष्ण कुसमरिया बड़ी चुनौती थे। इस वजह से शुरू से यह सीट चर्चा का विषय रही।

रैगांव – पिछले चुनाव में इस सीट पर बसपा की ऊषा चौधरी ने भाजपा के पुष्पराज बागरी को 4109 मतों से हराया था। चौधरी इस बार भी इसी सीट से चुनाव लड़ीं। उनका मुकाबला भाजपा के पूर्व मंत्री जुगलकिशोर बागरी और कांग्रेस की कल्पना वर्मा से था। यहां त्रिकोणीय मुकाबला है।

मनगवां – इस सीट से बसपा की वर्तमान विधायक शीला त्यागी मैदान में हैं। इस बार भाजपा ने यहां अपना प्रत्याशी बदला है। उनका मुकाबला भाजपा के पंचूलाल प्रजापति और कांग्रेस की बबीता साकेत से था।

अंबाह – बसपा ने वर्तमान विधायक सत्यप्रकाश का मुकाबला भाजपा के गब्बर सिंह और कांग्रेस के कमलेश जाटव से रहा। यह सीट भी रोचक मुकाबले में फंसी है।

जबलपुर पूर्व – यहां से भाजपा ने अंचल सोनकर पर पुन: विश्वास जताया। उनका मुकाबला लखन घनघोरिया रहा। इस सीट पर भी पेंच फंसा हुआ है।

जबलपुर पश्चिम – भाजपा के पूर्व विधायक हरेंद्रजीत सिंह बब्बू की सीधी टक्कर कांग्रेस के वर्तमान विधायक तरूण भनोत से है। पिछले चुनाव में बब्बू 923 वोटों से हारे थे।

जबलपुर उत्तर – भाजपा ने शरद जैन को यहां से फिर टिकट दिया है। उनका मुकाबला कांग्रेस के विनय सक्सेना से है। लेकिन जैन के सामने युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष व भाजपा से बागी हुए धीरज पटैरिया निर्दलीय खड़े हो गए जो जैन के लिए बड़ी चुनौती हैं।

बालाघाट – यहां भाजपा के गौरीशंकर बिसेन का मुकाबला कांग्रेस विश्वेश्वर भगत से है। वहीं, सपा से अनुभा मुंजारे मैदान में हैं जो पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहीं थी। यह सीट त्रिकोणीय मुकाबले की वजह से चर्चा में है।

ग्वालियर – भाजपा सरकार में मंत्री जयभान सिंह पवैया का मुकाबला कांग्रेस के प्रद्युम्न सिंह तोमर से है। यह सीट भी सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र है।

ग्वालियर दक्षिण – यहां से भाजपा से बागी हुई पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता पार्टी के प्रत्याशी नारायण सिंह कुशवाह के लिए बड़ी चुनाैती बनीं। समीक्षा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। कांग्रेस से प्रवीण पाठक मैदान में रहे।

सीहोर – पिछले चुनाव में निर्दलीय खड़े हुए सुदेश राय को भाजपा ने यहां से टिकट दिया। इस बार यहां से भाजपा के पूर्व विधायक रमेश सक्सेना की पत्नी ऊषा सक्सेना निर्दलीय चुनाव लड़ी। कांग्रेस से सुरेंद्र सिंह ठाकुर मैदान में थे। इस वजह से यह सीट चर्चा का केंद्र है।

निवाड़ी – यहां त्रिकोणीय मुकाबला होने से सीट फंस गई है। भाजपा ने यहां से अनिल जैन, कांग्रेस ने सुरेंद्र सिंह यादव और सपा ने मीरा यादव को मैदान में उतारा।
जौरा: यहाँ पर मुख्य मुकाबला भाजपा के सूबेदार सिंह और बनवारीलाल शर्मा के बीच है।

सुमावली: यहां भाजपा के अजब सिंह को कांग्रेस के ऐदल सिंह कसाना से कांटे की टक्कर मिल रही है। यहां के परिणाम पर पूरे प्रदेश की नजरें लगी हुई है।

करेरा: यहां मुख्य मुकाबला भाजपा के राजकुमार खटिक और कांग्रेस के जसवंत जाटव के बीच है।

पोहरी: भाजपा के प्रहलाद भारती और कांग्रेस के सुरेश रथखेड़ा के बीच यहां दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला। परिणामों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

अशोकनगर: भाजपा ने वर्तमान विधायक गोपीलाल जाटव का टिकट काटकर पूर्व विधायक लड्डूराम कोरी को टिकट दिया है। इस सीट पर पिछले तीन चुनावों से भाजपा का कब्जा है। कांग्रेस के जयपाल सिंह इस बार कड़ा मुकाबला देते दिख रहे हैं।

राऊ: यहां मुख्य लड़ाई मौजूदा विधायक और कांग्रेस के उम्मीदवार जीतू पटवारी और भाजपा के मधु वर्मा के बीच है।

चंदेरी: भाजपा के भूपेन्द्र द्विवेदी और कांग्रेस के गोपाल सिंह चौहान के बीच कड़ा मुकाबला।

पथरिया: भाजपा के लखन पटेल और कांग्रेस के गौरव पटेल के बीच कड़ा मुकाबला। एक ही जाति के प्रत्याशियों के होने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

शमशाबाद: भाजपा की राजश्री सिंह और कांग्रेस की ज्योत्सना यादव के बीच कड़ा मुकाबला।

नरसिंहगढ़: इस सीट पर कांग्रेस के वर्तमान विधायक गिरीश भंडारी को भाजपा का राजर्वधन सिंह से कड़ी टक्कर मिल रही है।

खिलचीपुर: 2013 से पहले इस सीट पर पिछले चार चुनावों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। पिछले चुनावों में भाजपा के हजारीलाल दांगी ने कांग्रेस के प्रियव्रत सिंह को हराया था। इस बार भी इन दोनों के बीच कड़ा मुकाबला है। कांग्रेस इस सीट पर वापसी के लिए पूरा दम झोंक चुकी है।

शुजालुपुर: यह सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का विषय बनी हुई है। पिछले तीन चुनावों से यहां भाजपा का कब्जा है। यहां भाजपा के इंदर सिंह परमार और कांग्रेस के रामवीर सिकरवार के बीच मुकाबला मुख्य मुकाबला है।

सोनकच्छ: पिछले चुनाव में भाजपा के राजेंद्र वर्मा ने तीन बार के विधायक सज्जन सिंह वर्मा को हराकर कांग्रेस के विजयी रथ को रोका था। इस सीट पर कांग्रेस ने अपनी वापसी के लिए पूरा दम झोंक दिया। मुख्य मुकाबला इस बार भी भाजपा के राजेंद्र वर्मा और कांग्रेस के सज्जन सिंह वर्मा के बीच है।

हाटपिपल्या : यहां भाजपा के दीपक जोशी का मुकाबला कांग्रेस के उम्मीदवार मनोज चौधरी से है।

बड़वाह: भाजपा के हितेंद्र सिंह सोलंकी की टक्कर सचिन बिरला से है।

खरगोन : भाजपा के बालकिशन पाटीदार और रवि जोशी के बीच दिलचस्प लड़ाई।

सेंधवा: यहां मुख्य मुकबला मौजूदा भाजपा विधायक अंतर सिंह आर्य और कांग्रेस के ग्यारसीलाल रावत के बीच है। भाजपा के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है।

झाबुआ : यहां फिलहाल बीजेपी का कब्जा है और यहां से शांतिलाल बिलवाल मौजूदा विधायक हैं। करीब ढाई लाख वोटरों वाली यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है। यहां बारी-बारी से कांग्रेस और बीजेपी जीत दर्ज करती आईं हैं। इस बार भाजपा के जीएस डामोर और कांग्रेस के विक्रांत भूरिया के बीच कड़ा मुकाबला ।

सांवेर: इंदौर जिले की यह सीट अनुसूचित जाति के सुरक्षित है। यहां भाजपा के राजेश सोनकर और कांग्रेस के तुलसी सिलावट के बीच कड़ा मुकाबला।

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