जानें बैंकों के विलय के बाद ग्राहकों का क्या होगा, जानने के लिए पढ़े पूरी खबर…

बैंकिंग सेक्टर को बूस्ट देने के लिए मोदी सरकार ने एक साथ 10 बैंकों के विलय का ऐलान किया है. इस विलय के बाद 4 नए बैंक अस्तित्व में आ जाएंगे. मतलब यह कि 6 बैंकों का दूसरे बैंकों में विलय जाएगा. 
हालांकि सरकार के इस ऐलान के साथ ही इन बैंकों के ग्राहकों के मन में तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं. आज हम आपको इस रिपोर्ट में इन सभी सवालों का जवाब देने जा रहे हैं.
किन- किन बैंकों का हो रहा विलय ?
सरकार ने कुल 10 बैंकों के विलय का ऐलान किया है. पहला विलय पंजाब नेशनल बैंक में यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक का होगा. इसी तरह दूसरे विलय के तहत केनरा बैंक में सिंडिकेट बैंक शामिल होगा. जबकि तीसरे विलय में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक एक हो जाएंगे. चौथे विलय की बात करें तो इंडियन बैंक में इलाहाबाद बैंक शामिल होगा. विलय के ऐलान के बाद अब देश में 12 PSBs बैंक रह जाएंगे. इससे पहले साल 2017 में पब्लिक सेक्टर के 27 बैंक थे.
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क्या विलय के बाद बैंकों का नाम भी बदलेगा?
सरकार के विलय के ऐलान के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि लीडर बैंक का नाम बदल सकता है लेकिन ऐसा नहीं होगा. SBI के रिटायर्ड CGM सुनील पंत के मुताबिक जो बैंक लीडर की भूमिका में होंगे उनका नाम नहीं बदलेगा.
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देना बैंक और विजया बैंक के विलय के बाद भी बैंक ऑफ बड़ौदा के नाम में कोई बदलाव नहीं हुआ. इसी तरह जब एसबीआई में अन्य 5 बैंकों का विलय हुआ तब भी लीडर बैंक के नाम पर कोई असर नहीं पड़ा. हालांकि जो लीडर बैंक में विलय करेंगे उनका अस्तित्व नहीं रह जाएगा.
क्या लोगों की नौकरी भी जाएगी?
विलय के ऐलान के बाद बैंकों के कर्मचारियों की नौकरी को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं. लेकिन सरकार की ओर से स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि विलय से किसी भी बैंक के कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी. उन्होंने कहा कि बड़े बैंकों को फोकस ग्लोबल बाजार पर रहेगा. मंझले बैंक राष्ट्रीय स्तर पर और छोटे बैंक स्थानीय स्तर पर फोकस करेंगे.
अकाउंट नंबर या कस्टमर आईडी बदलेगा?
SBI के रिटायर्ड CGM सुनील पंत के मुताबिक अगर आपका अकाउंट विलय होने वाले किसी भी बैंक में है तो आपको कुछ बदलावों का सामना करना पड़ सकता है. यह बदलाव अचानक नहीं होगा बल्कि धीरे-धीरे बैंकों के चेकबुक, अकाउंट नंबर, एटीएम कार्ड या कस्टमर आईडी में बदलाव संभव है. इस बदलाव के संबंध में बैंक अपने ग्राहकों को समय-समय पर जानकारी देते रहेंगे.
अगर विलय के दो बैंकों में अकाउंट है तो?
कस्टमर का विलय होने वाले दो या तीन बैंकों में अकाउंट है तो क्या होगा? इस सवाल के जवाब में सुनील पंत ने बताया कि यह लीडिंग बैंकों पर निर्भर करता है कि वो कैसे अपने कस्टमर को रखना चाहते हैं.
विलय के बाद भी कस्टमर एक से अधिक बैंक अकाउंट रख सकता है. लेकिन जब विलय की प्रक्रिया पूरी तरह से लागू हो जाएगी तो लीडर बैंक में ही आपके दो अकाउंट रहेंगे. वहीं नए बैंक के अस्तित्व में आने के बाद आपको आपके खाते की नई केवाईसी करानी पड़ सकती है.
क्या लोन की ईएमआई पर भी असर पड़ेगा?
अगर आपने विलय करने वाले बैंकों से लोन ले रखा है तो आपकी ईएमआई पर असर पड़ सकता है. सुनील पंत कहते हैं कि वर्तमान में सभी बैंक नए या पुराने ग्राहकों को रेपो रेट अधारित लोन दे रहे हैं. यह प्रक्रिया विलय वाले बैंकों पर भी लागू होगी. इसका ग्राहकों पर पॉजिटिव असर पड़ेगा.
मतलब यह कि विलय के बाद बैंक ग्राहक के लोन की ईएमआई सस्ती हो सकती है. हालांकि विलय वाले बैंकों के ब्रांच बंद हो सकते हैं. ऐसे में कस्टमर्स को नई ब्रांच में जाना पड़ सकता है. हालांकि इन बदलावों पर आखिरी फैसला बोर्ड करेगी.
ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
अगर आप इन बैंकों के कस्टमर हैं तो यह सुनिश्चित करें कि आपका ईमेल अड्रेस और मोबाइल नंबर बैंक के पास अपडेटेड है या नहीं. अगर अपडेट नहीं है तो इसे तुरंत करवा लें. इसका फायदा ये होगा कि बैंक के किसी भी बदलाव के बारे में आपको तुरंत जानकारी मिल जाएगी.





