बेटे को मंत्री बनाने की जिद की अटकलों के बीच ज्ञान सिंह ने मंत्री पद छोड़ा

भोपाल। ज्ञान सिंह ने शनिवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उनके पास आदिम जाति कल्याण मंत्रालय था। शहडोल से सांसद चुने जाने के बाद उन्होंने बांधवगढ़ से अपने बेटे शिवनारायण सिंह को टिकट देने की मांग की थी। हालांकि बाद में अटकलें चलीं कि जब उनका बेटा MLA बन गया, तो वे उसे मंत्री पद देने की मांग कर रहे थे। जानें पूरा मामला…

-ज्ञान सिंह ने शनिवार को मंत्री पद छोड़ दिया। वे सुबह सीएम हाउस पहुंचे और शिवराज को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
-उल्लेखनीय है कि शहडोल से सांसद चुने जाने के बाद उन्होंने बांधवगढ़ उप चुनाव तक मंत्री बने रहने देने का आग्रह किया था। बाद में अटकलें चलीं कि जब बांधवगढ़ से उनके बेटे शिवनारायण को विधायक चुन लिया गया, तो वे उसे मंत्री बनाने कि जिद कर रहे थे।
ये भी पढ़े: 15 जून के बाद शुरू हो सकती है MP में इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए काउंसलिंग
-ज्ञान सिंह ने सांसद बनने के बाद 5 दिसंबर, 2016 को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। चूंकि ज्ञान सिंह ने उपचुनाव तक मंत्री बनने रहने का आग्रह किया था, इसलिए शिवराज ने उनकी बात मान ली थी।
-सीएम के पास यह अधिकार होता है कि, वो किसी भी आम व्यक्ति को अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत छह महीने तक मंत्री बना सकता है, लेकिन दूसरी बार मंत्री बनने के लिए उसे विधायक चुना जाना आवश्यक होता है। लिहाजा ज्ञान सिंह का 5 जून, 2017 को छह महीने का कार्यकाल खत्म होने वाला था।
-राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं थीं कि ज्ञान सिंह अपने बेटे के लिए मंत्री पद मांग रहे थे, लेकिन यह भी संभव नहीं था। उनका बेटा पहली बार ही विधायक चुना गया है।





