बेटियों के लिए वरदान है यह गांव, जानिए क्यों?

2016_5image_17_02_1585380001-llभारत में बहुत सी एेसी जगह हैं, जहां पर बेटियों को बोझ समझा जाता है। एेेसे ही बहुत से एेेसे घर भी हैं, जहां पर बेटी के होने पर घरों में खुशिया मनाई जाती है। जो लोग लड़कियों को बोझ समझतें हैं वह बेटी के जन्म से पहले ही या जन्म के तुरंत बाद बेटी मार देते हैं जिसके कारण आज समाज में महिलाओं का अनुपात पुरुषों से बहुत कम है। इसलिए अाज कल हर  क्षेत्र में हर कोई बेटी बचाओ, बेटी पढाओ और बेटी लाओ,नन्हीं छांव जैसे कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। अाज हम अापको एक एेसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जो बेटीयों के लिए वरदान है, इसलिए हर लड़की इस गांव में पैदा होना चाहती हैं। तो अाइए जानते हैं….

 कहां  है यह गांव
 
यह राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित पिपलांत्री गांव है। इस गांव में बेटी के जन्म के बाद ख़ुशियां मनाई जाती है, जो हर लड़की के लिए वरदान से कम नही है। यह गांव हमें बेटी बचाने के लिए बहुत प्रेरित करता है। यहां पर जब किसी के घर में बेटी होती है तो मां-बाप 111 पेड़ लगाकर बेटी के जन्म की ख़ुशियां मनाते हैं। 
 
साथ ही गांव के सभी लोग मिलकर उस बच्ची के नाम पर 21  हजार रूपए इक्टठे करके बच्ची के नाम से बैंक में खाता खुलवाते हैं। इस परम्परा से यहां के लोग सिर्फ बेटी ही नहीं बल्कि पर्यावरण को भी बचा रहे है। इस परम्परा की शुरुवात पिपलांत्री भूतपूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल के द्वारा की गई थी। 
 
उन्होने इस परम्परा की शुरुवात अपनी बेटी के मरने के बाद की। उसको श्रद्धाजंलि देने के लिए पूरे गांव में पेड़ लगाना शुरू किया था। तब से जब भी इस गांव में किसी बेटी का जन्म होता है तो तब पुरे गांव वाले मिलकर 111 पेड़ लगाते है और इन पेड़ों को दीमक ना लगे इसके लिए इन पेड़ों के आसपास एलोवेरा (ग्वारापाठा) का पौधा भी लगाते हैं। इस गांव की परम्परा ने समाज में बदलाव को साथ प्रकृति में भी बदलाव लाया है। 
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