बारिश में भीगा हजारों क्विंटल प्याज, इस बात से अफसरों के फूल रहे हैं हाथ-पांव

भोपाल/सीहोर.प्याज खरीदी सरकार के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। सीहोर में 10 हजार और गुना में 2200 क्विंटल प्याज गुरुवार को बारिश में भीग गई। भोपाल में छह जिलों से आईं प्याज से भरी 1000 से ज्यादा ट्रॉलियां कतार में खड़ी हैं। भंडारण और परिवहन के इंतजाम न होने से गुरुवार शाम तक एक भी ट्रॉली की खरीदी नहीं हुई। रात 8:30 बजे के बाद खरीदी शुरू हो सकी। अफसरों में इस बात से और घबराहट हो रही है कि राजधानी में 23 जून को रमजान का आखिरी जुमा होने से खरीदी बंद रहेगी। इसके बाद रविवार और ईद के अवकाश हैं। इन तीन दिनों में ट्रॉलियों की संख्या और बढ़ जाएगी।
बारिश में भीगा हजारों क्विंटल प्याज, इस बात से अफसरों के फूल रहे हैं हाथ-पांव
भोपाल मंडी में भोपाल के अलावा राजगढ़, सीहाेर, विदिशा, रायसेन, शाजापुर के सैकड़ों किसान प्याज लेकर आए हैं। प्याज खरीदी के रजिस्ट्रेशन 25 जून तक किए जाएंगे। इसके बाद जिन किसानों ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया उनका प्याज नहीं खरीदा जाएगा।

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सरकारी लापरवाही… किसान की मेहनत पर पानी फिरा
भोपाल में 6 जिलों की 1000 ट्रॉली कतार में
राजधानी में अब तक 19096 किसानों से 90,275 क्विंटल प्याज खरीदी गई है। इसमें से 42,303 क्विंटल प्याज खुले में पड़ी है। 6 जिलों से आई 1000 ट्रॉलियां कतार में खड़ी हैं।
 
उद्यानिकी विभाग को मालूम ही नहीं 4 साल में किस जिले में कितने प्याज के गोदाम बने
प्याज की भारी मात्रा से सरकार की तैयारियों की कलई खुल गई। उद्यानिकी विभाग का दावा है कि वह वर्ष 2014 से 2018 तक लगातार गोदाम बना रहा है, लेकिन जब भंडारण की बारी आई है तो गोदाम ही नजर नहीं आ रहे। विभाग के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल का कहना है कि 3.2 लाख टन (30 लाख क्विं. से अधिक) प्याज की भंडारण क्षमता विकसित हो गई है, जबकि इसी विभाग के संचालक सत्यानंद ने आंकड़ा दिया है कि अब तक 5272 गोदाम बने हैं, जिनकी क्षमता 2.22 लाख टन (22 लाख क्विं.) है। इन दावों से सवाल खड़े हो गए हैं कि जब इतनी क्षमता है तो भंडारण को लेकर मारा-मारी क्यों हो रही है? संचालक यह भी कह रहे हैं कि कई जगह गोदाम बन रहे हैं। यहां बता दें कि 50 टन क्षमता के गोदामों के निर्माण की लागत 3.5 लाख रु. आ रही है। इसमें अ‌ाधी राशि सरकारी अनुदान की है। तमाम गोदाम किसानों की जमीन पर बने हैं। उद्यानिकी विभाग के इन गोदामों में कहां प्याज रखी है, पता ही नहीं चल रहा। संचालक का कहना है कि जहां गोदाम बन गए हैं, वहां किसान ने जरूर रखा होगा। उन्होंने यह भी बताया कि कोल्ड स्टोरेज तो एक भी नहीं हैं। महाराष्ट्र में इनकी संख्या जरूर है। इंदौर में अभी दो ही कोल्ड स्टोरेज के आवेदन आए हैं। प्रमुख सचिव वर्णवाल का तर्क है कि सारे गोदाम किसानों के हैं। वे चाहें तो रख सकते हैं। इसमें विभाग का कोई लेना-देना नहीं है।
 
बिगड़े हालात… 11 आईएएस अफसरों को फील्ड पर भेजा
11 जिलों के सरकारी खरीद केंद्रों पर अप्रत्याशित रूप से प्याज की आवक हो रही है। हालत यह हैं कि आगे के कुछ दिनों के टोकन बंटने के बाद भी उम्मीद नहीं है कि किसान की प्याज जल्दी बिक पाएगी। इन बिगड़े हालातों को संभालने के लिए 4 अपर मुख्य सचिव और 7 प्रमुख सचिवों को फील्ड में भेजा गया है। सरकार ने इन अफसरों को चैकलिस्ट भी थमाई है। वे इस बात की तस्दीक करेंगे कि प्याज किसान को छोड़कर किसी दूसरे स्त्रोत से तो नहीं आ रही? किसान द्वारा दिए गए घोषणा-पत्र के आधार पर सत्यापन भी कराएंगे? साथ ही सेटेलाइट जिले शिवपुरी, टीकमगढ़, रीवा और सागर में 100 फीसदी जांच होगी। इसी तरह प्याज सड़ी-गली तो नहीं है। खुले में तो नहीं रखी? भुगतान किसान के खाते में हुआ या नहीं? भुगतान के बाद भी 10 फीसदी खातों की जांच हो? खास तौर पर इसे भी देखें कि खरीदी गई मात्रा और परिवहन की गई प्याज का आंकड़ा सही है या गलत।
 
इनको यहां का जिम्मा
1. राधेश्याम जुलानिया : राजगढ़ जिले की ब्यावरा, सारंगपुर, नरसिंहगढ़, जीरापुर व खुजनेर।
2. केके सिंह : देवास जिले के देवास, कन्नौद, सोनकच्छ व हाटपिपल्या।
3. प्रभांशु कमल : उज्जैन जिले के उज्जैन, तराना, नागदा, बड़नगर, खाचरोद, महिदपुर, उन्हेल व घट्टिया।
4. बीआर नायडू : झाबुआ के पेटलावद।
5. मोहम्मद सुलेमान : सीहोर के सीहोर, आष्टा, इच्छावर व जावर।
6. मलय श्रीवास्तव : इंदौर जिले के इंदौर, सांवेर, महू व देपालपुर।
7. एसएन मिश्रा : रतलाम के रतलाम, जावरा, ताल व सैलाना।
8. मनोज श्रीवास्तव : शाजापुर के शाजापुर, शुजालपुर, अकोदिया, मोमन बडोदिया, मक्सी, कालापीपल व अरनियाकलां।
9. संजय बंदोपाध्याय : आगर के सुसनेर, बड़ौद, आगर, नलखेड़ा व कानड।
10. आशीष उपाध्याय : शिवपुरी के शिवपुरी व कैलारस।
11. जेएन कंसोटिया : रीवा के करहिया मंडी।
 
 
 
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