फिल्‍म नानक शाह फकीर पर विवाद जारी, एसजीपीसी पहुंची सुप्रीम कोर्ट

अमृतसर। फिल्म ‘नानक शाह फकीर’ पर विवाद बढ़ता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से फिल्म रिलीज किए जाने के आदेश के बावजूद इसका पंजाब में विरोध जारी है। शिरोमणि सिख गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी है। एसजीपीसी ने याचिका में कहा है कि इस मामले में उसका पक्ष भी सुना जाए।फिल्‍म नानक शाह फकीर पर विवाद जारी, एसजीपीसी पहुंची सुप्रीम कोर्ट

वहीं, विवाद गहराता देख श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने पांच सिंह साहिबान की आपात बैठक बुलाई है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश व पंजाब सरकार के निर्णय पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। एसजीपीसी के प्रवक्ता दिलजीत सिंह बेदी ने बताया कि अदालत ने फिल्म के निर्माता हरिंदर सिंह सिक्का का ही पक्ष सुन कर एक तरफा फैसला सुनाया है। संभावना है कि आज इस मामले पर सुनवाई हो सकती है। एसजीपीसी के कानूनी विशेष यह जांच रहे हैं कि फिल्म में सिख धर्म की भवनाओं को भड़काने की धारा 295 के तहत भी करवाई बनती है या नहीं।

वहीं, बुधवार को गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (जीएनडीयू) के धर्म व पंजाबी अध्ययन विभाग के विद्यार्थियों ने कक्षाओं का बायकॉट कर जीएनडीयू के गेट के बाहर प्रदर्शन किया और फिल्म पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि फिल्म सिख मर्यादा के खिलाफ है। फिल्म रिलीज करने के लिए हरिंदर सिक्का जो प्रयास कर रहे हैं, सिख कौम उसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

इसके अलावा मीरी-पीरी शिरोमणि ढाडी सभा ने भी बैठक कर फिल्म को रिलीज न करने का प्रस्ताव पारित किया। ढाडी सभा के संयोजक गुरमेज सिंह शहूरा ने कहा कि सिख परंपराओं के अनुसार कोई भी व्यक्ति गुरु साहिब व उनके परिवार के सदस्यों की भूमिका नहीं निभा सकता। अगर कोई ऐसा करता है, तो यह सिख सिद्धांतों को ठेस पहुंचाने वाली बात है। इससे सिखों की धार्मिक भावनाएं आहत होंगी।

विवाद के लिए जत्थेदार भी जिम्मेदार : भाई मोहकम सिंह

यूनाइटेड अकाली दल के अध्यक्ष भाई मोहकम सिंह ने भी कहा कि फिल्म पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए। पंजाब सरकार को नोटिफिकेशन जारी कर राज्य के किसी भी सिनेमाघर में फिल्म न लगाने के आदेश जारी करने चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह व एसजीपीसी की ओर से इस फिल्म को क्लीन चिट दी गई थी। दोनों की ओर से अलग-अलग स्वीकृति पत्र जारी किए थे। बाद में सिख संगत के विरोध को देखते हुए फिल्म पर रोक लगाने के आदेश जारी किए गए। इस विवाद को उलझाने के लिए जत्थेदार अकाल तख्त व एसजीपीसी दोनों ही बराबर के जिम्मेदार हैं। पहले स्वीकृति पत्र क्यों जारी किए गए, इसकी जांच होनी चाहिए।

मल्टीप्लेक्सेस में ट्रेलर्स बंद करवाए

जांलधर: सिख तालमेल कमेटी के सदस्यों ने बुधवार को विभिन्न सिख संगठनों को साथ लेकर शहर के कई मल्टीप्लेक्स में दिखाए जा रहे फिल्म के ट्रेलर रुकवा दिए। उन्होंने पुलिस कमिश्नर के नाम पर डीसीपी गुरमीत ङ्क्षसह को शिकायत दी। गुरमीत सिंह ने कहा कि कार्रवाई की जाएगी।

एसजीपीसी की नजर में विवादित रही फिल्में व नाटक

सिंह इज किंग, जो बोले सो निहाल, सुपर सिंह, सिंह साहिब, सन ऑफ सरदार, एनिमेशन फिल्म चार साहिबजादे पर भी विवाद रहे हैं। जिनको बाद में सुलझा लिया गया था। इसी तरह सीरियल तारक मेहता का उल्टा चश्मा और बाणी पर विवाद रहा था। इसको निर्माताओं के साथ बैठ कर निपटा लिया गया था।

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