प्रधानमंत्री के ये नवरत्न कर रहे विकास का सपना साकार

navratna_2016526_9436_26_05_2016नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के सपने को पूरा करने की जिम्मेदारी उनके नवरत्नों पर है। प्रधानमंत्री के इन नवरत्नों में राजनाथ सिंह(गृहमंत्री), अरुण जेटली(वित्त मंत्री), सुषमा स्वराज(विदेश मंत्री), सुरेश प्रभु(रेल मंत्री), नितिन गडकरी(केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री), रविशंकर प्रसाद (संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री), राजीव प्रताप रूडी (केंद्रीय कौशल विकास मंत्री), धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री, स्मृति ईरानी (केंद्रीय मानव संसाधन और विकास मंत्री) शामिल हैं। नरेंद्र मोदी सरकार के दो सालों में इन नवरत्नों ने क्या उपलब्धियां हासिल की है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूरा करने की दिशा में ये कितना आगे बढ़े हैं इस पर एक नजर।

राजनाथ सिंह (गृहमंत्री)

सरकार में नंबर दो पर गृहमंत्री का पद ही आता है, इसलिए इस पद की जिम्मेदारियां भी काफी बड़ी है। आंकड़ों की माने तो पिछले साल की तुलना मे इस साल घुसपैठ की घटनाएं काफी कम हुई हैं। 2015 में 33 घुसपैठ की घटनाएं हुई। वर्ष 2016 में 18 घटनाएं हुई हैं। इस दौरान 65 घुसपैठियों को मार गिराया गया। अगर बात की जाएं दाऊद हाफिज,लखवी,मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई की तो इस विषय में गृहमंत्री का कहना है, ‘मेरा मानना है कि कई अंतरराष्ट्रीय अपराधी पाकिस्तान में हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए। भारत को जो आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना है, कराया है। हमें इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए जो भी करना है करेंगे।‘

अरुण जेटली (वित्त मंत्री)

नरेंद्र मोदी के नवरत्न की लिस्ट में वित्त मंत्री अरुण जेटली का अपना एक खास स्थान है। अरुण जेटली प्रधानमंत्री के काफी करीबी माने जाते है और प्रधानमंत्री को वित्त मंत्री की काबिलियत पर काफी भरोसा है। इन दो सालों में देश 7.5 फीसद की वृद्धि दर के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा केंद्र की राजग सरकार ग्रामीण क्षेत्र, रोजगार सृजन और मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने को प्राथमिकता दे रही है। काले धन पर सरकार ने एंटी ब्लैक मनी कानून तैयार किया है और लोगों से कहा है कि वो अपनी ब्लैक मनी के बारे में खुलासा करें और वो 30 फीसदी पेनाल्टी के साथ 60 फीसदी टैक्स का भुगतान करें।

सुषमा स्वराज (विदेश मंत्री)

मोदी सरकार की नवरत्न की लिस्ट में तीसरे नंबर पर आती हैं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज। इन दो सालों में पडौसी मुल्क पाकिस्तान के साथ हमारे सबंध बेशक ठीक ना हुए हो लेकिन अमेरीका, जर्मनी, फ्रांस, जापान तथा आस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ भारत की बढ़ी हुई नजदीकियों ने विश्व में भारत की छवि में इजाफा किया है। भारत के विदेशो में अच्छे सबंधों का ही नतीजा है कि यमन और अन्य जगह फंसे भारतीयों को वापस सुरक्षित स्वदेश लाया जा सका है।

सुरेश प्रभु (रेल मंत्री)

रेलवे में इन दो सालों काफी परिवर्तन देखने को मिले है। रेल यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए काउंटर से खरीदे गए रिजर्व टिकट को टेलीफोन पर 139 हेल्पलाइन पर फोन करने या एसएमएस करके रद्द करने की सुविधा दी गई है। इसके अलावा रेलवे में साफ-सफाई से लेकर सुरक्षा पर भी अधिक जोर दिया जा रहा है। रेल मंत्री खुद ट्विटर इतने सक्रिय दिखाई देते हैं। अगर कोई यात्री ट्विटर के माध्यम से कोई परेशानी रेल मंत्री के साथ साझा करता है तो रेल मंत्री तुरंत ऐसी परेशानिया का निपटारा करते हैं। वहीं अगर बात की जाए फंडिंग की समस्या की तो उसे दूर किया गया है और जल्द ही रेलवे देश के दूसरे सेक्टरों की सेहत दुरुस्त करने में मदद करेगा। रेलवे में निजी निवेश आना शुरू हुआ है। ऐसी उम्मीद की जा रही हैं कि अगले 3 साल में रेलवे के क्षेत्र में काफी बदला देखेंने को मिलेंगे। साथ ही रेलवे में आने वाले 2 साल में आमदनी बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। इसके अलावा हमेशा से ट्रैक की परेशानियों से जूझती रेलवे अब इन ट्रैक को दुरुस्त करने पर गौर देने लगा है।

रविशंकर प्रसाद (केंद्रीय टेलीकॉम मंत्री)

मोदी सरकार के कार्यकाल के दो वर्ष पूरे हो गए है। इन दो सालों में देश में सबसे अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश टेलीकॉम क्षेत्र में आया। इसके अलावा चीन में बनने वाले मोबाइल फोन अब भारत में भी बनाए जाने लगे हैं। डिजीटल इंडिया की मुहिम चलाने वाले प्रधानमंत्री की सरकार में मोबाइल फोन धारकों की संख्या एक अरब से अधिक हो गई। वहीं हमेशा घाटे में चलने वाली बीएसएनएल भी लाभ कमाकर देने लगी है। रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व में डाकघरों के राजस्व में बढ़ोतरी हुई। सरकार अब डिजिटल इंडिया के मद्देनजर अब डिजिटल साक्षरता में तेजी लाने के लिए प्रयासरत दिख रही हैं।

नितिन गडकरी (केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री)

प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी के नजदीक लोगों में माने जाने वाले गडकरी के पास सड़क परिवन का जिम्मा है। इस समय देश में रोजाना 300 से 400 मौतें हो रही हैं, जो सरकर के लिए सिरदर्द बनी हुई है। गड़करी ने प्रभार संभालने के बाद सड़कों को दुरुस्त करने का जिम्मा लिया। साथ ही ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आधुनिक किया जा रहा है, ताकि हादसों को कम किया जा सके। गडकरी के मुताबिक 3 लाख से ज्यादा प्रोजेक्ट अटके हुए थे। इनमें से 95 फीसदी क्लीयर कर दिए हैं। जीडीपी में 2 फीसदी का सहयोग आने वाले साल में करेंगे। कई टोल टैक्स खत्म किए जा रहे हैं। नेशनल हाइवे टोल इंफोर्मेशन सिस्टम बनाया गया है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक टोल कनेक्शन सिस्टम भी बनाया जा रहा है। हर टोल प्लाजा पर इंटरनेट से जुड़े कैमरे लगाए जा रहे हैं। हादसों की जानकारी देने के लिए टोल फ्री नंबर 1033 की शुरुआत की जा रही है। 1363 हेल्पलाइन नंबर शुरू कर रहे हैंए जोकि 12 भाषाओं में उपलब्ध होगी। जिससे विदेशी लोगों को मदद मिलेगी।

राजीव प्रताप रूडी (केंद्रीय कौशल विकास मंत्री)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे अहम प्रोजेक्ट कौशल विकास की जिम्मेदारी राजीव प्रताप रूडी पर ही है। जिस देश की 54 फीसदी आबादी 25 साल से कम उम्र की होए जिस देश की 62 फीसदी आबादी 15 से 60 साल के बीच की हो वहां अगर सिर्फ तीन फीसदी लोगों ने स्किल ट्रेनिंग ली हो तो चिंता की बात होगी ही। ये आंकड़े इसलिए भी परेशान करने वाले हैं क्योंकि जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में 80 फीसदी से ज्यादा लोगों स्किल ट्रेंड हैं। रूडी का सबसे बड़ा अचीवमेंट है केंद्र और राज्य में मानक स्थापित किया।

धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री)

पूरे देश में लागू की गई डायरेक्टर कैश सब्सिडी योजना की बड़ी कामयाबी का श्रेय धर्मेंद्र प्रधान को ही जाता है। इस योजना ने एलपीजी वितरण में होने वाली धांधली को काफी हद तक खत्म कर दिया। जो लोग गैस सब्सिडी लेना चाहते हैं उनके बैंक अकाउंट में सीधे रकम ट्रांसफर हो रही है। धर्मेंद्र प्रधान सबसे बड़ी जन वितरण प्रणाली को 14 करोड़ ग्राहकों तक पहुंचा पाए। साल 2016-17 तक 27 करोड़ घरों में से 11.12 करोड़ लोगों तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाना है। देश में अब भी जलावन के तौर पर लकड़ी का बहुत इस्तेमाल होता है। इसकी वजह से हर साल 5 लाख से ज्यादा महिलाओं की मौत होती है।

स्मृति ईरानी (केंद्रीय मानव संसाधन और विकास मंत्री)

अगर विवाद के हिसाब से देखें को स्मृति का मंत्रालय सबसे ज्यादा विवादित मुद्दों से घिरा रहा। कभी दिल्ली यूनिवर्सिटी के चार साल के डिग्री कोर्स का मामला हो या फिर सीसैट परीक्षा को लेकर उठा विवाद। खुद स्मृति की पढ़ाई को लेकर भी कई सवाल उठे। लेकिन इन सबसे परे स्मृति ईरानी प्रधानमंत्री के सबसे भरोसेमंद मंत्रियों में से एक हैं। शिक्षा मंत्री के तौर पर डिजिटल क्रांति को पढ़ाई से जोड़ रही हैं।

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