पिता और बेटे के बीच बातों की समझ और बिहेवियर बनाएगा रिश्ता मजबूत

1_1442469785कई पिता-पुत्र के रिश्ते में प्रेम कम और मतभेद ज्यादा होते हैं। युवा ज्यादातर विद्रोही नेचर का होता है और सोचता है कि उसके पिता उसकी इच्छा को क्यों नहीं समझ पा रहे हैं लेकिन यही बात वह उस समय भूल जाता है जब वह स्वयं पिता बनता है। बदलता वक्त पिता और पुत्र की सोच और बिहेवियर को काफी हद तक प्रभावित करता है।
 
इमोशन का न छुपाएं
ऐसा नहीं है कि बाप-बेटे एक दूसरे को प्यार नहीं करते। लेकिन पुरुषत्व एक ऐसा ईगो है कि वहां प्यार जताना मुश्किल होता है। जबकि मां और बीवी के सामने यह आसान है।
अनुशासन और सम्मान
बढ़ते हुए पुत्र और पिता के बीच एक भय का रिश्ता होता है। इस भय का मतलब डर नहीं होता। इसमें पिता की ओर से अनुशासन और पुत्र की ओर से सम्मान होता है।
औपचारिकता से बचें
लाख प्यार-मोहब्बत के बावजूद एक हल्की सी फॉर्मेलिटी पिता और पुत्र के बीच में होती है। बेहतर संबंधों के लिए इस फॉर्मेलिटी से आगे आकर एक दूसरे को समझने का प्रयास करें।

 

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