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पद्मपुराण के अनुसार जो व्यक्ति जीवन में करता है ये काम वो हो जाता है बर्बाद, इसलिए…..

धर्म व्यक्ति को अच्छाई के रास्ते पर चलने की सीख देते हैं, जो इनका पालन करते हुए अपना जीवन यापन करते हैं, उन्हें जीवन में किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। वहीं जो लोग धर्म की अवहेलना करते हैं और धर्म की सीख का पालन नहीं करते हैं, उनका जीवन दुःख से भर जाता है। हम यहाँ किसी एक धर्म की नहीं बल्कि सभी धर्म की बात कर रहे हैं, हर धर्म में इंसान को अच्छाई के मार्ग पर चलने की सीख दी जाती है, लेकिन आजकल लोग इसका पालन नहीं करते हैं।पद्मपुराण के अनुसार जो व्यक्ति जीवन में करता है ये काम वो हो जाता है बर्बाद, इसलिए…..

कई लोग आज के समय में धर्म को बकवास मानते हैं और बार-बार धर्म की निंदा करने से भी नहीं कतराते हैं। ऐसे लोगों को जीवन में कभी ना कभी बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर हिंदू धर्म की बात करें तो हिंदू धर्म में अच्छाई का पाठ पढ़ाने के लिए और अन्य विषयों का ज्ञान देने के लिए कई धार्मिक पुस्तकों की रचना की गयी है। अगर देखा जाए तो हिंदू धर्म जितनी पुस्तक किसी अन्य धर्म में नहीं है। हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग इन पुस्तकों की बातों का पालन करते हैं।

धार्मिक शास्त्रों और पुराणों में सूखी जीवन के कई उपाय बताए गए हैं, जिनका पालन करने पर व्यक्ति का जीवन सँवर जाता है। कई लोग इन बातों का पालन भी करते हैं और सुखी जीवन जीते हैं, वहीं कई लोग भटक जाते हैं और ग़लत आदतें अपना लेते हैं। ग़लत आदतें व्यक्ति को बर्बाद कर देती हैं। पद्मपुराण में ऐसी चार आदतों के बारे में बताया गया है, जो किसी भी व्यक्ति को बर्बाद कर देती है। इसलिए इन आदतों से दूर रहना चाहिए।

श्लोक:
न चात्मानं प्रशंसेद्वा परनिन्दां च वर्जयेत्।
वेदनिन्दां देवनिन्दां प्रयत्नेन विवर्जयेत्।।
अर्थ:
ख़ुद की तारीफ़ करने वाला, भगवान की निंदा करने वाला, वेदों का आदर ना करने वाला और इसकी बुराई करने वाला एवं हर समय दूसरों की बुराई करने वाला व्यक्ति बहुत जल्दी बर्बाद हो जाता है।

ये चार अवगुण कर देते हैं व्यक्ति को बर्बाद:
*- ख़ुद की तारीफ़ करना:

ख़ुद की तारीफ़ करना भी एक तरह का अवगुण होता है जो व्यक्ति को घमंडी बना देता है। ऐसे लोग हमेशा ख़ुद को दूसरों से ज़्यादा बेहतर समझते हैं। वह किसी से कुछ सीखते भी नहीं हैं जो उनके लिए विनाश का कारण बनता है।

*- भगवान की निंदा करना:

कई ऐसे लोग भी होते हैं जो भगवान की निंदा करते हैं और धर्म शास्त्रों में विश्वास नहीं करते हैं। ऐसे लोगों की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है और वह ग़लत रास्ते पर चलने लगते हैं, एक समय ऐसा भी आता है जब वह पूरी तरह से बर्बाद भी हो जाते हैं।

*- वेदों का अपमान करना:

वेद-पुराण ज्ञान का भंडार हैं और जो ज्ञान के भंडार का अपमान करेगा उसका जीवन तो बर्बाद होना ही है। वेदों और पुराणों में ज्ञान की कई बातें बताई गयी हैं, जिनका पालन करने वाला व्यक्ति सुखी जीवन जीता है। जो व्यक्ति इन बातों का पालन नहीं करता है, वह जीवन में कभी सफल नहीं हो पाता है।

*- दूसरों की निंदा करना:

किसी भी व्यक्ति की निंदा करना या अपमान करना शास्त्रों में बुरा बताया गया है। ऐसा करने वाला व्यक्ति जाने-अनजाने में अपने कई दुश्मन बना लेता है जो उसे कभी ना कभी नुक़सान पहुँचाते हैं। इसलिए कभी भी दूसरों की बुराई नहीं करनी चाहिए।

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