नागपंचमी से जुड़ी ये रोचक जानकारी, हैरान कर देंगी आपको…

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हमारे देश में जीव-जन्तुओं को धर्म और भगवान के साथ जोड़ा गया है। इसके धार्मिक पहलुओं के साथ ही एक कारण मानव के मन में जीव-जन्तुओं के लिए दया भाव पैदा करना भी रहा है। इन जीव जंतुओं में गाय, नंदी, सांप, उल्लू, मोर, चूहा आदि शामिल हैं। सांपों से जुड़ी पर्व नागपंचमी का हमारे देश में बहुत महत्व है। इसका क्या कारण है और क्यों नागपंचमी पर सांपों को दूध से नहलाते हैं? आइए, जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब…नागपंचमी से जुड़ी ये रोचक जानकारी, हैरान कर देंगी आपको...

भविष्य पुराण में नागों के बारे में बताई गई हैं ये बातें
भविष्य पुराण के अनुसार, नागों को पंचमी तिथि बहुत प्रिय है। इस तिथि पर नागलोक में उत्सव मनाया जाता है। इस तिथि को जो भी व्यक्ति नागों को दूध से स्नान कराता है, उसके कुल को सांपों से भय नहीं रहता और वासुकि, तक्षक, कालिय, मणिभद्र, ऐरावत, धृतराष्ट्र, ककोंटक तथा धनंजय जैसे नाग उनकी रक्षा करते हैं।

क्यों चढ़ाते हैं सांपों पर दूध?
एक बार एक शाप के कारण नागलोक जलने लगा था। तब नागों पर दूध चढ़ाकर उनकी जलन को शांत किया गया था। तब पंचमी तिथि थी। तभी से पंचमी तिथि पर नागों को गाय के दूध से नहलाने की प्रथा चली आ रही है। ऐसा करने से सर्प-भय नहीं रहता।

कब करते हैं सर्प गर्भधारण?
भविष्य पुराण के अनुसार, ज्येष्ठ और आषाढ़ मास में सर्पों का कामभाव जागृत होता है। वर्षा ऋतु के चार महीने में नागिन गर्भ धारण करती हैं। फिर कार्तिक मास में एक नागिन एक बार में करीब 240 अंडे देती है और हर दिन उन अंडों में से कुछ को खुद ही खाती रहती है।

कैसे अंडे से निकलता है कैसा सांप, जानें
जो अंडे तिड़क कर या लुड़ककर इधर-उधर हो जाते हैं, उन्हीं से आगे सांप निकलते हैं। सोने की तरह चमकनेवाले और धारीदार अंडों में से मादा और शिरीष पुष्प के समान रंगवाले अंडों में से नपुंसक सांप निकलते हैं।

जन्म से लेकर विष दंत आने तक
नागिन 6 महीने तक अंडे सेती है। फिर इनसे निकले बच्चों का रंग 7 दिनों के भीतर काला हो जाता है। सात दिन के बाद बच्चे के दांत निकलने लगते हैं और 21 दिन के बाद उनमें विष आ जाता है।

6 तरह से होती है सांपों की मृत्यु
सांपों की मृत्यु 6 तरीकों से होती है, ऐसा भविष्य पुराण में बताया गया है। मोर से, मनुष्य से चकोर पक्षी से, बिल्ली से, नेवले से, शूकर से, बिच्छू से और गाय, भैंस, घोड़े, ऊंट आदि के पैरों में कुचल जाने से। अगर इन सबसे सांप बच जाता है तो वह 120 साल तक जीता है।

इतने दिन बाद ले सकता है जान
हालांकि सांप के विष के दांत 21 दिन में आ जाते हैं लेकिन वह 25 दिनों के बाद इस लायक हो जाता है कि किसी के प्राण हर सके। सांप के 240 पैर होते हैं। बिना मौसम के जो सांप पैदा होते हैं, उनमें विष कम होता है और उनकी आयु 75 साल होती है।

हैरान रह जाओगे जानकर
सांप के 1 मुंह 2 जीभ और बत्तीस दांत होते हैं। साथ ही विष से भरी हुई 4 दाढ़ होती हैं। सांप की दाढ़ों में हमेशा विष नहीं रहता। दाहिनी आंख के पास विष रहने का स्थान है। क्रोध आने पर यह विष पहले मस्तक से धमनी में, फिर नाड़ियों में और फिर नाड़ियों से दाढ़ में पहुंचता है।

इन 8 कारणों से काटता है सांप
सांप के काटने के 8 कारण भी भविष्य पुराण में बताए गए हैं। इनमें दवाब पड़ने से, पुराने बैर के कारण, डर से, भूख से, विष का वेग होने से, बच्चों की रक्षा के लिए और साथ ही काल की प्रेरणा से।

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