दिल्ली की 100 कॉलोनियों के पुनरोद्धार की प्रक्रिया भी हो गई शुरू, पढ़े पूरी खबर

1,797 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की चर्चा के बीच अब दिल्ली की 100 कॉलोनियों के पुनरोद्धार की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। यह सभी कॉलोनियां सरकारी जमीन पर बसी हैं और यहां रहने वाले लोगों को उसी जगह नया आशियाना बनाकर दिया जाएगा। यह कार्य दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की निगरानी में होगा। डीडीए ने इस आशय का प्रस्ताव भी तैयार कर लिया है जिसे स्वीकृति के लिए मंगलवार को उपराज्यपाल एवं डीडीए के अध्यक्ष अनिल बैजल की अध्यक्षता में होने वाली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।

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650 से ज्‍यादा झुग्‍गी सरकारी जमीन पर

जानकारी के मुताबिक दिल्ली में केंद्र सरकार की जमीन पर 650 से ज्यादा झुग्गी बस्तियां बसी हैं। इसमें से 300 से ज्यादा झुग्गी बस्तियां डीडीए की जमीन पर हैं। 2022 तक राजधानी को झुग्गी मुक्त करने और सभी को अपना आवास देने के केंद्र सरकार के मिशन के तहत डीडीए ने भी काम तेज कर दिया है।

पीपीपी मोड पर होगा विकास

डीडीए इन कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाएं देने के लिए सीटू प्रोजेक्ट के तहत पुनर्विकास शुरू करेगा। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत योजना में डेवलपर ही झुग्गियों की जगह फ्लैट बनाने पर पूरा पैसा खर्च करेगा। इसके बदले वह खाली जमीन का उपयोग कमर्शियल डेवलपमेंट के लिए करेगा। इससे बिल्डर अपनी आय को बढ़ा सकेगा।

कठपुतली कॉलोनी में चल रहा काम

फिलहाल इस दिशा में कठपुतली कॉलोनी में काम चल रहा है। वसंत कुंज स्थित झुग्गी बस्ती, रोहिणी सेक्टर-18 और 19, कीर्ति नगर, दिलशाद गार्डन, शालीमार बाग के झुग्गी कलस्टर में काम शुरू कर दिया गया है। उपराज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद सौ कॉलोनियों में भी सर्वे शुरू होगा और सलाहकार नियुक्त कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराकर टेंडर जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। दो से तीन वर्ष में इन कॉलोनियों की झुग्गियों के निवासियों को दो कमरों वाला सभी सुविधाओं से युक्त फ्लैट मिल जाएगा।

बोर्ड बैठक के एजेंडा में शामिल कुछ अन्य प्रस्ताव

1. ग्रुप हाउसिंग सोसायटी के प्लॉटों का आवंटन नीलामी से करने का प्रस्ताव है।

2. रोहिणी आवासीय योजना-1981 में प्लॉट पर निर्माण करने की समय सीमा को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव।

3. पेट्रोल पंप/गैस गोदाम को शिफ्ट करने की पॉलिसी में बदलाव का प्रस्ताव है।

4. रिहायशी और मिश्रित भू उपयोग में 90 साल की लीज खत्म हो गई है। उनका नवीनीकरण करने का भी प्रस्ताव है।

कड़कड़डूमा के पास 20 एकड़ जमीन पर होगा विकास कार्य

पूर्वी दिल्ली में कड़कड़डूमा के पास डीडीए की 20 एकड़ जमीन खाली पड़ी हुई है। इस जमीन पर विकास कार्य शुरू करने को लेकर भी डीडीए ने एक प्रस्ताव तैयार किया है, जिसको बोर्ड बैठक में स्वीकृति के लिए रखा जाना है।

जोन बंटवारे को लेकर जारी होगी अधिसूचना

लैंड पूलिंग पॉलिसी को पांच जोनों एन, पी टू, के वन, एल और जे में बांटा गया है। किस जोन में दिल्ली के किन-किन गांवों को शामिल किया गया है, डीडीए इसकी अधिसूचना जारी करेगा। इस आशय का प्रस्ताव भी डीडीए की बोर्ड बैठक में उपराज्यपाल की स्वीकृति के रखा जा रहा है।

बदलेगा बीटीपीएस की जमीन का भू उपयोग

प्रदूषण की मार के चलते कोयला आधारित बदरपुर थर्मल पावर स्टेशन (बीटीपीएस) पिछले साल पूरी तरह बंद कर दिया गया था। नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) इसकी जमीन पर एक ईको पार्क तैयार करेगा। लेकिन यह जमीन चूंकि ओ जोन में है, लिहाजा डीडीए पहले इसके भू उपयोग में बदलाव करेगा। इस आशय के प्रस्ताव पर भी उपराज्यपाल की मुहर लगनी है।

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