दक्षिण अफ्रीका से भारत आएंगे और चीते

प्रोजेक्ट चीता की सफलता से उत्साहित दक्षिण अफ्रीका अब भारत को और चीते देने को राजी हो गया है। इसके तहत जल्द ही छह से आठ और चीते लाए जा सकते हैं। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की दक्षिण अफ्रीका के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई चर्चा में बनी सहमति के बाद चीतों की नई खेप को कूनो में रखने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
वैसे भी कूनो में बाहर से आने वाले चीतों को रखने के लिए जो ढांचा तैयार किया है, उसमें भविष्य में भी बाहर से आने वाले चीतों का लांचिंग ग्राउंड कूनो ही रहेगा। फिलहाल मौजूदा समय में मध्य प्रदेश के कूनो और गांधी सागर अभयारण्यों में 53 चीते हैं। इस बीच मध्य प्रदेश के नौरादेही अभयारण्य को चीतों का एक तीसरा ठिकाना भी बनाने की तैयारी अंतिम दौर में है।
माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक कूनो से कुछ चीतों को वहां शिफ्ट किया जा सकता है। इसके बाद चीतों की एक खेप को गुजरात के बन्नी अभयारण्य में रखने की तैयारी है। पिछले दिनों राजस्थान के सरिस्का अभयारण्य में प्रोजेक्ट चीता को लेकर भी चर्चा हुई थी। इसमें प्रोजेक्ट चीता के भविष्य का रोडमैप प्रस्तुत किया गया था।
इस दौरान बताया गया था कि कैसे कूनो और गांधी सागर में चीते खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं। साथ ही शिकार भी कर रहे हैं। गौरतलब है कि देश में 2022 में नामीबिया से आठ, 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और 2026 में बोत्सवाना से नौ चीते लाए गए हैं। हालांकि मौजूदा समय में भारत में जन्मे चीते ही व्यस्क हो गए हैं।
राजस्थान ने भी मांगे हैं चीते चीतों को बसाने को लेकर अकेले मध्य प्रदेश और गुजरात ही नहीं, बल्कि राजस्थान भी रूचि दिखा रहा है। सरिस्का में आयोजित एक सम्मेलन में राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के सामने यह मांग रखी और कहा कि वह भी अपने यहां चीतों को बसाना चाहते हैं।
गौरतलब है कि प्रोजेक्ट चीता के तहत राजस्थान के मुकुंदरा, शाहगढ़ व भैंस रोडगढ़ अभयारण्य को चीतों के लिए उपयुक्त पाया गया था। वैसे भी कूनो से चीते निकलकर लगातार राजस्थान की सीमा में दाखिल हो रहे हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच एक चीता कारिडोर बनाने का भी प्रस्ताव है।





