…तो इस वजह से ब्राह्मण हमेशा अपने सिर पर रखते हैं चोटी

जमाना काफी बदल गया हे और अब हर किसी को हर चीज के बारे में जानकारी इंटरनेट के जरिए मिल जाती है। लेकिन वहीं कुछ परंपरा व रिती रिवाज आज भी हमें देखने को मिल जाते हैं जिनके पीछे का कारण हमें पता नहीं चल पाता है। दरअसल बात ये भी है कि इन रिवाजों को लोग दोहराते तो वर्षों से आ रहे हैं लेकिन उसके पीछे छिपे कारणों के बारे में शायद ही उन्हें पता होगा। आज हम आपको एक ऐसे ही विषय के बारे में बताने जा रहे हैं जी हां दरअसल आपने अक्सर पंडित और ब्राह्मणों को सिर पर चोटी रखते हुए देखा होगा।...तो इस वजह से ब्राह्मण हमेशा अपने सिर पर रखते हैं चोटी

लेकिन आपने ये सोचा है कि आखिर ये लोग ऐसा क्यों करते हैं। आज हम आपको इसी के बारे में बताएंगे कि आखिर क्यों ब्राह्मण और पंडित सिर पर चोटी रखते हैं। हमारी संस्कृति में हिंदुओं ने या कहें आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वालों ने अपने सिर पर हमेशा चोटी या शिखा रखी है। यह एक चीज ऐसी है, जिसके बारे में लोग बहुत कम जानते हैं और अभी तक चिकित्सा के क्षेत्र में यह प्रमाणित नहीं है कि मस्तिष्क का एक और हिस्सा है, जिसे योग पद्धति में पहचाना गया है, वह है बिंदु। बिंदु का मतलब है, सबसे छोटा चिह्न, जो आगे और विभाजित न हो सके। दुनिया भर की कई सभ्यताओं ने मस्तिष्क में बिंदु की मौजूदगी को स्वीकार किया है।

 जानें ब्राह्मण सिर पर क्यों रखते है चोटी

सबसे पहले तो आपको ये बताते चलें की हिंदू धर्म में ब्राह्मण जब छोटे बालकों को दीक्षा देते हैं या संस्कारित करते हैं, तो वे सिर के बाकी बाल उतरवा देते हैं और एक चुटिया छोड़ देते हैं। जिसके बाद वो बालक हर बार साधना से पहले वह अपनी चोटी को पकड़कर उसे घुमाता, मोड़ता और खींचता है। वह चोटी को बांधने से पहले उस बिंदु पर पर्याप्त जोर डालता है। ये बात शायद आपको पता नहीं होगा क्योंकि आजकल यह परंपरा खत्म हो चुकी है मगर ब्राह्मण के लिए ऐसा करना जरूरी था।

जी हां ब्राहम्ण के लिए हर दिन उसे अपनी सीखा को पकड़ कर खींचना होता था वह रोजाना अपनी साधना से पहले उसे खींचकर कसकर बांधता था ऐसा करने के दौरान शुरूआत में उन्हे थोड़ी सी पीड़ा जरूर होती है। मगर कुछ समय के बाद, जैसे-जैसे उसकी साधना बेहतर होती है, इससे उसके भीतर परमानंद की बहुत गहरी भावना पैदा होती है क्योंकि मस्तिष्क का बिंदु एक छोटी सी जगह है, जिसके आस-पास एक खास स्राव होता है। अब ये बात सामने आती है कि आखिर ब्राहम्ण सीखा क्यों बांधते हैं तो आपको बता दें की सुश्रुत संहिता में वर्णित है कि मस्तिष्क के अंदर जहां बालों का केंद्र होता है वहां पर संपूर्ण नाडिया और संधियों का मिलन होता है उसे अधिपति मर्म कहा जाता है।

उस स्थान पर यदि व्यक्ति को चोट लगती है तो उसकी मृत्यु भी हो जाती है। इस कारण मनुष्य के सभी ज्ञान इंद्रियों का संबंध इसी से होता है और कर्म इंद्रियों का संबंध मस्तु लिंग से होता है और तो और था उनकी ज्ञानेंद्रियां शक्तिशाली होती है। बच्चे के जन्म के पहले तीसरे पांचवे और सातवे वर्ष के अंत में मुंडन करते हैं तथा केवल जिस स्थान पर चोटी रखते हैं ल उस स्थान को सहस्रार कहते हैं। उस स्थान के कुछ नीचे आत्मा का निवास होता है चोटी रखने के बाद में इस कारण से उस में गांठ की लगा दी जाती है।

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