ऐसे 20 मुस्लिम देश, जहाँ तीन तलाक पर लगा है बैन

मुसलमानों में तीन तलाक की प्रथा को खत्म करने को लेकर बहस तेज हो गई है। पीएम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तीन तलाक को सामाजिक बुराई करार दिया। वहीं लखनऊ में आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने साफ कहा है कि शरई मामले में दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।तीन तलाक की प्रथा

देश में तीन तलाक पर चल रहे गतिरोध के बीच महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पाकिस्तान समेत दुनिया के 20 देश से अधिक देशों में तीन तलाक पर बैन है। जानते हैं किस देश में क्या हैं तलाक के नियम –

अभी अभी: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, तीन तलाक को खत्म किया!

मिस्र
मिस्र पहला ऐसा देश है जिसने वर्ष 1929 में अपने यहां तलाक पद्धति में बदलाव किया। नयूज वेबसाइट स्कूपहूप के मुताबिक मिस्र ने यह बदलाव 13वीं सदी के इस्लामिक विद्वान इब्न तयमियाह द्वारा की गई कुरान की व्याख्या के आधार पर किया। यहां एक सत्र में तीन बार तलाक बोलने को एक तलाक ही माना जाता है। तीन तलाक तीन स्तरीय प्रक्रिया का पहला चरण है। पहले तलाक के बाद 90 दिन का वेटिंग पीरियड है।

श्रीलंका
श्रीलंका एक मुस्लिम बहुल देश नहीं है लेकिन मुस्लिम विद्वानों का मानना है कि यहां कानून सबसे अच्छा है। श्रीलंका के नियम के मुताबिक यदि कोई मुसलमान अपनी पत्नी को तलाक देना चाहता है तो वह मुस्लिम जज कादी को नोटिस देगा। फिर जज, दोनों परिवारों के सदस्य, बड़े-बुजुर्ग तथा अन्य प्रभावशाली मुसलमान दोनों को समझाने का प्रयास करेंगे। नोटिस के 30 दिन के बाद पति अपनी पत्नी को तलाक दे सकता है। तलाक मुस्लिम जज और दो गवाहों की उपस्थिति में होगा।

पाकिस्तान
पाकिस्तान में तीन तलाक को समाप्त करने के लिए एक कमेटी की सिफारिशों के आधार पर नियम बनाए गए। पाकिस्तान के नियमों के मुताबिक पति तलाक लेने के लिए सरकार संस्‍था चेयरमैन ऑफ यूनियन कौंसिल के पास नोटिस देगा। 30 दिन बाद यह कौंसिल दोनों के बीच सुलह कराने का प्रयास करेगी। कुल 90 दिन के वेटिंग पीरियड के बाद यदि समझौता नहीं हुआ तो तलाक माना जाएगा। पत्नी तलाक के बाद फिर से विवाह कर सकती है।

इराक
इराक में एक बार में तीन तलाक बोलने पर एक ही तलाक माना जाता है। पति और पत्नी दोनों को ही तलाक लेने का हक है। अदालत पति और पत्नी के बीच झगड़े के वजह की जांच कर सकता है। अदालत दोनों के बीच सुलह के लिए दो लोगों की नियुक्ति कर सकता है। अदालत स्वयं भी मध्यस्‍थता कर सकती है। अदालत इसके बाद फैसला लेगी।

ट्यूनिशिया
ट्यूनिशिया के कानून के मुताबिक बिना जज से सलाह किए कोई भी पति एकतरफा अपनी पत्नी को तलाक नहीं दे सकता है। उसे तलाक का समुचित कारण भी बताना होगा। यहां पर शादी सीधे राज्य और न्यायपालिका के अंतर्गत आता है। सुलह-समझौते को लेकर अदालत के प्रयास को मानना होगा।

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