तमिल पत्रिका ने महिलाओं के लेगिंग्स पहनने को बताया ‘अमर्यादित’, सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया

kumudamनई दिल्ली (25 सितंबर): तमिल मैगजीन ‘कुमुदम’ में हाल ही में छपी कवर स्टोरी पर बवाल मच गया है। इस स्टोरी में महिलाओं के लेगिंग्स (चुस्त पैंट) पहनने को ‘मर्यादा पार’ करना बताया गया है। इस स्टोरी के छपने के बाद सोशल मीडिया पर एक ऑनलाइन पिटीशन के जरिए मैगजीन के ख़िलाफ अभियान छिड़ गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कविता मुरलीधरन नाम की एक स्वतंत्र पत्रकार मैगजीन में छपे इस लेख से काफी नाराज हैं। उन्होंने बुधवार को ‘चेंज.ओआरजी (change.org)’ पर एक ऑनलाइन पिटीशन शुरू की है। जिसमें कुमुदम मैगजीन को इस स्टोरी के लिए माफी मांगने के लिए कहा जा रहा है। इस पिटीशन में देशभर से करीब 5000 लोगों ने साइन भी किया है। जिनमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं। बता दें, ट्विटर पर भी कई लोग इस पिटीशन में साइन करने की वकालत कर रहे हैं।

कविता मुरलीधरन ने बताया, ”मैंने इस पिटीशन को शुरू किया, क्योंकि मुझे बहुत गुस्सा आया। मेरा मानना है कि एक मेनस्ट्रीम मैगजीन होने के कारण कुमुदम ने तमिल समाज में महिला द्वेषी नजरिया और विचार फैलाने में भूमिका अदा की है। मुझे एक महिला होने के कारण गुस्सा आया। क्योंकि कुमुदम मुझे यह सिखाने का प्रयास कर रही थी कि मुझे क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। मुझे एक पत्रकार होने के कारण गुस्सा आया क्योंकि कुमुदम के स्वनियुक्त मोरल पुलिसमैन ने नैतिक पत्रकारिता के सारे मानकों को तोड़ दिया। इसके साथ ही निजता का पूर्ण उल्लंघन भी किया।”

गौरतलब है, इस मैगजीन के कवर के साथ स्टोरी के अंदर छापी गई तस्वीरों में महिलाओं के पीछे का हिस्सा प्रदर्शित करते हुए दिखाया गया था। इन अलावा हवा में कुर्ते के उड़ने के दौरान खींची गई तस्वीरों को भी स्टोरी के साथ छापा था। इसके बाद से सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जिनमें स्टोरी और इसमें इस्तेमाल की तस्वीरों को महिलाओं के लिए अपमानजनक कहा जा रहा है।

इनमें यह भी सवाल किया जा रहा है, कि क्या महिलाओं को पता भी है कि बिना उनकी सहमति के तस्वीरें ली गईं। कई कमेंट्स में फोटोग्राफर्स की हरकत की निंदा भी की गई है। गौरतलब है, कि कविता मुरलीधरन की पिटीशन में दावा किया गया है कि स्टोरी के बाद, ”कुमुदम के संपादक और मैनेजिंग डायरेक्टर ने स्टोरी पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। वे अपनी मैगजीन की गलती मानने को तैयार ही नहीं हैं। इसलिए पिटीशन में साइन करिए और कुमुदम को माफी मांगने और जिम्मेदार स्टोरीज छापने का वादा करने के लिए मजबूर कीजिए।”

बता दें, कुमुदम एक साप्ताहिक मैगजीन है। जिसे 1947 में पीवी पार्थसार्थी और एसएपी अन्नामलाई ने शुरू किया था।

 

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