जिस भाई को बांधना चाहती है राखी, उसी ने मानसिक रोगी बताकर साथ रखने से किया इंकार

  • भोपाल.32 साल की नमिता दीक्षित ने एनआरआई कॉलेज से एमसीए किया था। सात महीने से वह निर्भया महिला आश्रम में है। माता-पिता का देहांत हो चुका है। मां के जाने के बाद वह टूट गई। दिमाग पर असर हुआ। यहां से उसकी जिंदगी एक त्रासदी में बदल गई। उसे राखी की याद आई तो भागकर भाई व मामा के घर जा पहुंची। उसे अपनाना तो दूर पहचानने से तक इंकार कर दिया। भाई आनंद दीक्षित उसे अपने पास नहीं रखना चाहता। शादीशुदा बहन अनीता ने भी नाता तोड़ लिया है। मामा चुन्नीलाल और मामी मंजू बुजुर्ग है। उनके घर की अपनी समस्या हैं। उन्होंने नमिता को अपने पास रखा था, लेकिन उसकी मानसिक स्थिति से घबराकर दूर हो गए। नमिता से एक साल छोटे भाई आनंद का कहना है कि नमिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, उसे साथ रखना संभव नहीं है।
    जिस भाई को बांधना चाहती है राखी, उसी ने मानसिक रोगी बताकर साथ रखने से किया इंकार
    हमीदिया अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आरएन साहू नमिता का इलाज कर रहे हैं। उनका कहना है कि नमिता सदमे में है और उसे अपनों के प्यार की जरूरत है। कई बार सामान्य परिवारों में रच-बसकर मरीज की स्थिति पर अनुकूल असर होना शुरू होता है। लेकिन जरूरी है कि परिजनों में उतना धैर्य हो।

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    सात माह पूर्व सड़क पर बेसुध मिली थी नमिता
    निर्भया महिला आश्रय गृह के प्रभारी समर खान ने बताया- सामान्य रूप से रह रही नमिता सात दिन पहले आश्रम से भाग गई थी। शाहजहांनाबाद पुलिस ने साकेत नगर स्थित मामा के घर के पास से ढूंढ निकाला। मामा रखना नहीं चाहते थे तो पुलिस ने उसे आश्रयघर छोड़ दिया। सात माह पूर्व नमिता सड़क पर बेसुध हालत में घूम रही थी। तत्कालीन कलेक्टर निशांत वरवडे ने जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी काे आदेश दिया कि महिला को शेल्टर दिया जाए। उसके कारण आश्रय की दूसरी महिलाओं को भी परेशानी हुई।
     
    ऐसी दशा क्यों हुई?
    मामी मंजू शुक्ला के मुताबिक नमिता के पिता सुरेंद्र कुमार घर छोड़कर चले गए थे। मां ज्ञानबाला ने तीनों बच्चों का पालन पोषण किया। वे उनके यहां ही रहती थीं। बड़ी बेटी अनीता की शादी के बाद मां ने ही बड़ी लगन से नमिता को एमसीए कराया। आनंद को इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कराई। मां को लकवा लग गया। दोनों बच्चे साथ ही रहते थे। मां की मौत के बाद नमिता सदमे में आ गई। इसके बाद सब बिखर गया। राखी का त्योहार आया तो उसके मन में अपने भाई से मिलने का भाव प्रकट हुआ। मगर अब उसके लिए दुनिया दूसरी है।
     
     
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