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जानिए, चोट लगने या जल जाने पर कैसे भरता है शरीर का घाव  

कभी न कभी हम सबको चोट लगती है। क्या आपने कभी सोचा है कि चोट लगने के बाद या जलने के बाद अगर शरीर का घाव न भरे तो क्या होगा? अगर ऐसा हो गया, तो सबसे पहले आपके शरीर का पूरा खून निकल जाएगा और फिर घाव में खतरनाक बैक्टीरिया और जर्म्स पैदा हो जाएंगे। धीरे-धीरे ये घाव बढ़ता जाएगा और पूरा शरीर सड़ जाएगा। इसलिए कुदरत ने शरीर को इस तरह व्यवस्थित किया है कि कटने या जलने के बाद त्वचा खुद ही रिकवर होना शुरू हो जाती है। कुदरत को आप जितना जानते जाएंगे, आपका आश्चर्य उतना ही बढ़ता जाएगा। चोट के बाद शरीर का घाव भरने की प्रक्रिया बेहद दिलचस्प है, जो 6 स्टेप्स में पूरी होती है। आइये आपको बताते हैं क्या है पूरी प्रक्रिया।जानिए, चोट लगने या जल जाने पर कैसे भरता है शरीर का घाव  

चोट के बाद खून जमना

ये घाव भरने की प्रक्रिया का सबसे पहला स्टेज है। जैसे ही खून आपके शरीर से बाहर निकलता है, ये लिक्विड से जेल में बदलने लगता है। इसके कारण घाव लगने पर खून गाढ़ा हो जाता है और एक पर्त बना लेता है। इस प्रक्रिया में शरीर में मौजूद प्लेटलेट्स, कोलेजन के साथ मिलता है और एक गाढ़ी जेलनुमा पर्त बनाता है। इन दोनों को मिलाने का काम शरीर में मौजूद थ्रोंबिन नामक एंजाइम करता है। अब जब आपके घाव के ऊपर खून की एक गाढ़ी पर्त बन गई, तो आपके शरीर से खून बाहर निकलने की प्रक्रिया बंद हो जाती है। इस तरह बाकी बचे खून को शरीर सुरक्षित कर लेता है। इसी सबके बीच घाव वाले अंग में सूजन आ जाती है। सूजन का मुख्य उद्देश्य आपको ये बताना है कि चोट के कारण ये जगह प्रभावित हो गई है और आप इसका उपचार करें।

24 से 48 घंटे का समय

थक्का जमने के बाद आपका शरीर, त्वचा पर मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और संक्रमण वाले वायरस आदि से खुद को बचाने की प्रक्रिया शुरू करता है। इस प्रक्रिया में शरीर में मौजूद व्हाइट ब्लड सेल्स आगे बढ़कर शरीर की मदद करते हैं। शरीर से खून बंद होने के साथ ही व्हाइट ब्लड सेल्स घाव और उसके आस-पास मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को मारने की प्रक्रिया शुरू कर देते हैं। ये प्रक्रिया चोट लगने के बाद से 24 से 48 घंटे तक चलती है।

चोट लगने के तीसरे दिन

चोट लगने के तीसरे दिन जैसे ही घाव से व्हाइट ब्लड सेल्स अपना काम खत्म करती हैं वैसे ही कुछ स्पेशल सेल्स अपने काम में लग जाती हैं, जिन्हें मैक्रोफैजेंस कहते हैं। ये सेल्स घाव की बैक्टीरिया से रक्षा भी करती हैं और कुछ विशेष प्रोटीन्स का उत्सर्जन करती हैं। इन्हीं प्रोटीन्स से नए टिशूज के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होती है। नए टिशूज के निर्माण की ये प्रक्रिया आमतौर पर चौथे-पांचवे दिन तक चलती है।

चोट लगने के पांचवे दिन

एक बार चोट से संक्रमण का खतरा पूरी तरह टल गया, तो घाव के भरने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। सबसे पहले मैक्रोफैजेंस द्वारा उत्सर्जित प्रोटीन्स और अन्य तत्वों को मिलाकर शरीर नई टिशूज का निर्माण शुरू कर देता है। इन टिशूज को एपिथेलियल टिशूज कहते हैं। इसके बाद ये टिशूज घाव के केंद्र की तरफ सिकुड़ना शुरू होती हैं। जब यही एपिथेलियल टिशूज घाव के ऊपर झीनी पर्त बना लेती हैं, तो एपिथेलियल सेल्स का निर्माण होता है और त्वचा पर एक भूरी पर्त आ जाती है। ये प्रक्रिया 24 घंटे से 4 दिन तक चलती रह सकती है।

एक सप्ताह बाद

एक सप्ताह बाद घाव पूरा भर चुका होता है। लेकिन इस दौरान त्वचा पर मौजूद भूरी पर्त को उखाड़ना नहीं चाहिए क्योंकि नई बनी टिशूज अभी कमजोर होती हैं। इस पर्त को उखाड़ने से टिशूज अगर दोबारा अलग हो गईं, तो फिर से घाव हो सकता है। इस प्रक्रिया के बाद टिशूज को मजबूत और लचीला बनाने की प्रक्रिया शुरू होती है। ये काम कोलेजन फाइबर्स करते हैं।

ऐसे होता है घाव ठीक

आमतौर पर 9-10 दिन में त्वचा लगभग ठीक हो चुकी होती है मगर इसमें उतनी मजबूती और लचीलापन नहीं होता है, जितना स्वस्थ त्वचा में होता है। घाव भरने की ये प्रक्रिया कितने दिन चलेगी ये घाव की गंभीरता पर निर्भर करता है। घाव की गंभीरता के अनुसार इसे पूरी तरह ठीक होने में 21 दिन से 2 साल तक का समय लग सकता है।

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